आलसी कौन सा ग्रह बनाता है? यह सवाल बहुत से लोगों के मन में आता है, खासकर तब जब बार-बार कोशिश करने के बाद भी काम करने का मन नहीं करता या बिना किसी वजह के सुस्ती बनी रहती है।
क्या यह केवल आदत है, या इसके पीछे कोई ग्रहों का रहस्य छिपा है? वैदिक ज्योतिष मानता है कि हमारे सोचने, महसूस करने और काम करने के तरीके पर ग्रहों का गहरा प्रभाव पड़ता है।
कुछ ग्रह हमें मेहनती बनाते हैं, तो कुछ ग्रह भ्रम, टालमटोल और आलस्य की ओर ले जाते हैं।
अगर आप जानना चाहते हैं कि ज्योतिष के अनुसार आलस्य किस ग्रह से जुड़ा है, वह कब और कैसे असर करता है, और इससे बाहर निकलने के उपाय क्या हैं—तो आगे पढ़ते रहें।
नीचे आपको इस विषय से जुड़े ऐसे रोचक और उपयोगी तथ्य मिलेंगे, जो आपकी सोच को नई दिशा दे सकते हैं।
आलसी कौन सा ग्रह बनाता है? (Which Planet Causes Laziness?)

वैदिक ज्योतिष के अनुसार आलस्य का सीधा संबंध राहु ग्रह से माना जाता है। जब राहु जन्म कुंडली में अशुभ स्थिति में होता है या लग्न, मन और कर्म से जुड़े भावों को प्रभावित करता है, तब व्यक्ति में बिना कारण सुस्ती, काम टालने की आदत और मानसिक भ्रम बढ़ने लगता है।
ऐसे लोग जानते हैं कि क्या करना चाहिए, लेकिन फिर भी उसे करने की ऊर्जा नहीं जुटा पाते। यह समझना ज़रूरी है कि शनि की तरह राहु मेहनत नहीं सिखाता, बल्कि मन को भटकाता है।
इसी कारण राहु के प्रभाव में व्यक्ति आलसी, असमंजस में रहने वाला और लक्ष्य से भटका हुआ महसूस कर सकता है। यही वजह है कि ज्योतिष में आलस्य का मुख्य कारक राहु ग्रह को माना गया है।
शनि ग्रह और उसका वास्तविक प्रभाव
शनि ग्रह को वैदिक ज्योतिष में सबसे धीमी गति से चलने वाला ग्रह माना गया है। यही कारण है कि शनि को धैर्य, समय और कर्म का कारक कहा जाता है।
इस उपशीर्षक को समझना इसलिए जरूरी है क्योंकि शनि को अक्सर गलत तरीके से आलस्य का ग्रह मान लिया जाता है।
जिन लोगों की जन्म कुंडली में शनि मजबूत होता है या लग्न, कर्म भाव या दशम भाव पर उसका प्रभाव होता है, वे लोग काम धीरे करते हैं लेकिन गहराई और जिम्मेदारी के साथ करते हैं।
उदाहरण के लिए, कोई व्यक्ति जो हर काम को सोच-समझकर करता है, जल्दी परिणाम की बजाय स्थायी सफलता चाहता है, उस पर शनि का प्रभाव हो सकता है। ऐसे लोग बाहर से सुस्त दिख सकते हैं, लेकिन वास्तव में वे आलसी नहीं होते।
शनि व्यक्ति को अनुशासन सिखाता है। वह बिना मेहनत के परिणाम नहीं देता।
शनि के प्रभाव में जीवन में संघर्ष, देरी और बाधाएँ आती हैं, लेकिन यही संघर्ष व्यक्ति को आत्मनिर्भर, मजबूत और कर्मशील बनाते हैं। इसलिए वैदिक ज्योतिष में शनि को कर्मफल दाता कहा गया है, न कि आलस्य का ग्रह।
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राहु ग्रह
जहाँ शनि अनुशासन सिखाता है, वहीं राहु भ्रम पैदा करता है। इसीलिए ज्योतिष शास्त्र में आलस्य का मुख्य कारण राहु ग्रह को माना गया है।
राहु एक छाया ग्रह है, जिसका सीधा संबंध मन, सोच, इच्छाओं और मानसिक असंतुलन से होता है।
जब किसी व्यक्ति की जन्म कुंडली में राहु अशुभ स्थिति में होता है, तो वह व्यक्ति बिना किसी ठोस कारण के थका हुआ महसूस कर सकता है।
उदाहरण के लिए, कोई व्यक्ति पर्याप्त नींद लेने के बाद भी सुस्ती महसूस करे, या जरूरी काम होते हुए भी मोबाइल, कल्पनाओं या बेवजह की सोच में समय बर्बाद करे—यह राहु के प्रभाव का संकेत हो सकता है।
विशेष रूप से जब राहु वृश्चिक राशि में होता है या लग्न राशि पर दृष्टि डालता है, तब व्यक्ति मानसिक रूप से अस्थिर हो सकता है।
उसे वास्तविक दुनिया से कटाव, वैराग्य, या काल्पनिक दुनिया में रहने की आदत हो सकती है। यह स्थिति कार्यक्षमता को धीरे-धीरे कम कर देती है।
कुंडली में राहु की भाव स्थिति का प्रभाव
किसी भी ग्रह का प्रभाव केवल उसकी राशि से नहीं, बल्कि उसके भाव से भी तय होता है। यह बात राहु के मामले में और भी अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है।
वैदिक ज्योतिष के अनुसार, जब राहु पंचम, सप्तम या नवम भाव में स्थित होता है, तो उसकी दृष्टि सीधे लग्न भाव पर पड़ती है।
इस स्थिति में व्यक्ति की निर्णय लेने की क्षमता कमजोर हो सकती है। उदाहरण के तौर पर, छात्र पढ़ाई को लेकर भ्रमित रहते हैं, नौकरीपेशा लोग काम टालते हैं और व्यवसायी निर्णय लेने से बचते हैं।
ऐसे लोग जानते हैं कि क्या करना है, लेकिन फिर भी उसे करने की ऊर्जा नहीं जुटा पाते। यह मानसिक आलस्य राहु के अशुभ प्रभाव का स्पष्ट संकेत है।
स्थिर राशियाँ और आलस्य की प्रवृत्ति
वैदिक ज्योतिष में राशियों को चर, स्थिर और द्विस्वभाव के रूप में वर्गीकृत किया गया है। वृषभ, सिंह, वृश्चिक और कुंभ को स्थिर राशियाँ कहा जाता है।
इस उपशीर्षक को समझना इसलिए जरूरी है क्योंकि कई बार आलस्य ग्रहों से नहीं बल्कि राशि के स्वभाव से आता है।
यदि किसी व्यक्ति की लग्न राशि या चंद्र राशि स्थिर राशियों में से कोई है, तो वह व्यक्ति बदलाव को अपनाने में समय लेता है।
उदाहरण के लिए, वृषभ राशि वाला व्यक्ति आराम पसंद हो सकता है, सिंह राशि वाला व्यक्ति तब तक सक्रिय नहीं होता जब तक उसे प्रेरणा न मिले, और कुंभ राशि वाला व्यक्ति विचारों में इतना डूबा रहता है कि कार्य पीछे रह जाते हैं।
इन राशियों के स्वामी ग्रह—शुक्र, सूर्य, मंगल और शनि—अपने-अपने तरीके से व्यक्ति की ऊर्जा को नियंत्रित करते हैं। इसलिए अन्य ग्रह अनुकूल होने पर भी इन राशियों में आलस्य की प्रवृत्ति देखी जा सकती है।
राहु की महादशा और अंतर्दशा का प्रभाव

दशा प्रणाली वैदिक ज्योतिष का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। राहु की महादशा लगभग 18 वर्षों तक चलती है और इस दौरान व्यक्ति के जीवन में गहरे मानसिक और व्यवहारिक परिवर्तन आते हैं। इस उपशीर्षक के अंतर्गत यह समझना जरूरी है कि दशा केवल घटनाएँ नहीं, बल्कि मानसिक स्थिति भी बदलती है।
राहु की महादशा या किसी अन्य ग्रह की महादशा में राहु की अंतर्दशा के समय व्यक्ति असमंजस में रह सकता है।
उदाहरण के लिए, करियर में बार-बार दिशा बदलना, लक्ष्य तय न कर पाना, या काम शुरू करके बीच में छोड़ देना—ये सभी राहु दशा के प्रभाव हो सकते हैं।
यदि इस समय राहु कुंडली में अशुभ भाव में स्थित हो, तो आलस्य, उदासीनता और आत्मविश्वास की कमी बढ़ जाती है।
राहु के अशुभ प्रभाव से उत्पन्न नकारात्मक आदतें

राहु केवल आलस्य ही नहीं, बल्कि उससे जुड़ी कई नकारात्मक आदतें भी देता है। इस उपशीर्षक को समझना इसलिए आवश्यक है क्योंकि आलस्य अक्सर अकेला नहीं आता।
राहु के प्रभाव में व्यक्ति नशे, जुए, अत्यधिक सोशल मीडिया उपयोग या गलत संगति की ओर आकर्षित हो सकता है।
उदाहरण के लिए, कोई व्यक्ति काम करने के बजाय घंटों वीडियो देखता रहे या गलत लोगों के साथ समय बिताकर अपने लक्ष्य भूल जाए—यह राहु दोष का संकेत हो सकता है। ऐसी आदतें आलस्य को और गहरा बना देती हैं।
राहु के अशुभ प्रभाव को कम करने के उपाय
वैदिक ज्योतिष केवल समस्या नहीं बताता, बल्कि उसके समाधान भी देता है। राहु के अशुभ प्रभाव को कम करने के लिए कुछ सरल और व्यावहारिक उपाय बताए गए हैं।
चंदन से बने उत्पादों का उपयोग मन को शांति देता है और राहु की ऊर्जा को संतुलित करता है। शुक्रवार या रविवार को भगवान भैरव की पूजा करने से मानसिक भ्रम कम होता है।
इसके अलावा, विकलांग व्यक्तियों या कुष्ठ रोग से पीड़ित लोगों की सेवा करना राहु को अनुकूल बनाने का प्रभावी उपाय माना गया है। सेवा भाव व्यक्ति के भीतर सकारात्मकता और उद्देश्य की भावना जगाता है।
निष्कर्ष
अंत में यह समझना आवश्यक है कि आलस्य केवल ग्रहों का परिणाम नहीं है, बल्कि जीवनशैली, सोच और कर्मों का भी इसमें बड़ा योगदान होता है।
वैदिक ज्योतिष और जन्म कुंडली हमें आत्मविश्लेषण का एक मार्ग प्रदान करती है। यदि शनि के अनुशासन और राहु के भ्रम को समझकर आत्मअनुशासन, सही दिनचर्या और सकारात्मक प्रयास किए जाएँ, तो आलस्य पर नियंत्रण पाया जा सकता है।
इस प्रकार, आलस्य और वैदिक ज्योतिष के संबंध को सही दृष्टिकोण से समझकर व्यक्ति न केवल ग्रह दोषों को संतुलित कर सकता है, बल्कि एक सक्रिय, संतुलित और उद्देश्यपूर्ण जीवन भी जी सकता है।
FAQs
आलस्य का मुख्य कारण क्या है?
ज्योतिष के अनुसार आलस्य का मुख्य कारण मन पर ग्रहों का नकारात्मक प्रभाव होता है, विशेष रूप से राहु का। जब राहु जन्म कुंडली में अशुभ स्थिति में होता है, तो व्यक्ति की सोच भ्रमित हो जाती है और कार्य करने की इच्छा कम हो जाती है। इसके साथ-साथ खराब दिनचर्या, मानसिक तनाव और अनुशासन की कमी भी आलस्य को बढ़ा देती है। इसलिए आलस्य केवल आदत नहीं, बल्कि मानसिक और ग्रहों से जुड़ी स्थिति भी हो सकती है।
क्या राहु आपको आलसी बनाता है?
हाँ, वैदिक ज्योतिष के अनुसार राहु ग्रह आलस्य पैदा कर सकता है, खासकर तब जब वह कुंडली में अशुभ भाव में स्थित हो या लग्न और चंद्रमा को प्रभावित कर रहा हो। राहु व्यक्ति के मन में भ्रम, टालमटोल और अस्थिरता पैदा करता है। इसके कारण व्यक्ति काम करने के बजाय कल्पनाओं, मोबाइल या बेवजह की सोच में समय बर्बाद करता है। यही वजह है कि राहु को आलस्य और मानसिक सुस्ती का प्रमुख ग्रह माना गया है।
कौन सा ग्रह खराब होने से नींद नहीं आती है?
ज्योतिष के अनुसार चंद्रमा और राहु के खराब होने से नींद की समस्या उत्पन्न होती है। चंद्रमा मन और भावनाओं का कारक ग्रह है, और जब वह कमजोर होता है, तो व्यक्ति को बेचैनी, चिंता और अनिद्रा हो सकती है। वहीं राहु मन में डर, भ्रम और अधिक सोच पैदा करता है, जिससे रात में नींद नहीं आती। यदि कुंडली में चंद्रमा पर राहु का प्रभाव हो, तो नींद से जुड़ी समस्याएँ और अधिक बढ़ सकती हैं।

विजय वर्मा वैदिक ज्योतिष (Vedic Astrology) और रत्न विज्ञान (Gemstone Science) में 20+ वर्षों का अनुभव रखते हैं। उन्होंने 10,000 से अधिक कुंडलियों (Horoscopes) का विश्लेषण किया है और व्यक्तिगत व पेशेवर उन्नति के लिए सटीक मार्गदर्शन प्रदान किया है। उनका अनुभव उन्हें एक भरोसेमंद ज्योतिष विशेषज्ञ बनाता है।