मंगल ग्रह खराब होने से कौन सी बीमारी होती है? जानें स्वास्थ्य पर मंगल के नकारात्मक प्रभाव

मंगल ग्रह खराब होने से कौन सी बीमारी होती है? यह सवाल अक्सर उन लोगों के मन में आता है जो ज्योतिष और स्वास्थ्य के बीच के गहरे संबंध को समझना चाहते हैं।

क्या सच में ग्रहों की स्थिति हमारे शरीर और मन पर असर डालती है? खासतौर पर मंगल ग्रह, जिसे शक्ति, साहस और ऊर्जा का प्रतीक माना गया है, जब कमजोर हो जाता है तो यह हमारे स्वास्थ्य पर कैसे प्रभाव डालता है?

अगर आपकी कुंडली में मंगल पीड़ित या अशुभ स्थिति में है, तो यह कई तरह की बीमारियों और शारीरिक परेशानियों का कारण बन सकता है।

इस लेख में हम विस्तार से जानेंगे कि मंगल ग्रह खराब होने से कौन-कौन सी बीमारियाँ होती हैं, उनके लक्षण क्या हैं, और इनसे बचने के आसान ज्योतिषीय उपाय कौन से हैं।

अगर आप बार-बार थकान, गुस्सा, चोट या रक्त से जुड़ी बीमारियों से परेशान हैं, तो यह जानकारी आपके लिए बहुत उपयोगी साबित होगी।

मंगल ग्रह खराब होने से कौन सी बीमारी होती है? (Which Diseases Are Caused by a Weak Mars?)

मंगल ग्रह खराब होने से कौन सी बीमारी होती है?

जब कुंडली में मंगल ग्रह कमजोर या अशुभ स्थिति में होता है, तो इसका असर व्यक्ति के शरीर और मन दोनों पर दिखाई देने लगता है।

ज्योतिष के अनुसार मंगल ग्रह रक्त, मांसपेशियों, साहस और ऊर्जा का कारक है, इसलिए इसके कमजोर होने पर शरीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमता घट जाती है।

व्यक्ति को अक्सर थकान, क्रोध, चोट या दुर्घटनाओं की समस्या होती है। इसके साथ ही उच्च रक्तचाप, त्वचा रोग, गठिया, फोड़े-फुंसी या खून की कमी जैसी परेशानियाँ भी बढ़ सकती हैं।

जिन लोगों की कुंडली में मंगल आठवें या बारहवें भाव में स्थित हो, उन्हें इन रोगों का खतरा अधिक होता है।

आगे इस लेख में हम विस्तार से जानेंगे कि मंगल ग्रह खराब होने से कौन-कौन सी बीमारियाँ होती हैं और उनसे बचाव के उपाय क्या हैं।

मंगल का महत्व और स्वभाव

मंगल को सेनापति ग्रह कहा जाता है, क्योंकि यह ग्रह व्यक्ति में पराक्रम, आत्मविश्वास, साहस और ऊर्जा का संचार करता है। जन्म कुंडली में मंगल की स्थिति से यह पता चलता है कि व्यक्ति कितना साहसी, निर्णायक और कार्यकुशल है।

अगर मंगल शुभ स्थिति में हो तो व्यक्ति अपने जीवन में बड़ी सफलता प्राप्त करता है। उदाहरण के लिए, कई सैनिक, पुलिस अधिकारी और खेल जगत के लोग तब तक सफल नहीं होते जब तक उनकी कुंडली में मंगल शुभ स्थिति में न हो।

मंगल को अग्नि तत्व का ग्रह माना गया है, इसलिए यह ऊर्जा और जोश का प्रतीक है। इसका रंग लाल और दिशा दक्षिण मानी जाती है। मंगलवार का दिन मंगल ग्रह को समर्पित है और मूंगा इसका प्रमुख रत्न है।

कैसे होता है मंगल खराब

मंगल ग्रह कमजोर या दोषपूर्ण तब होता है जब व्यक्ति कुछ गलत आदतें या जीवनशैली अपनाता है। लाल किताब और वास्तु शास्त्र के अनुसार, यदि घर का पश्चिम दिशा वाला भाग दूषित है, तो मंगल पीड़ित हो जाता है।

हनुमानजी का अपमान करना, धर्म का पालन न करना या भाइयों और मित्रों से दुश्मनी रखना भी मंगल दोष को बढ़ाता है। लगातार मांसाहार करना और अनियंत्रित क्रोध रखना भी इसके नकारात्मक प्रभाव को बढ़ाता है।

कुंडली में यदि मंगल चौथे या आठवें भाव में हो, या सूर्य और शनि के साथ स्थित हो, तो यह ग्रह शुभ फल देने में असमर्थ हो जाता है।

मंगल के साथ केतु या बुध का संयोग भी इसे कमजोर बनाता है। ऐसे में व्यक्ति का आत्मविश्वास और निर्णय लेने की क्षमता कम हो जाती है।

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शुभ मंगल के संकेत

अगर मंगल ग्रह शुभ स्थिति में हो, तो व्यक्ति में असाधारण नेतृत्व क्षमता और साहस होता है। ऐसा व्यक्ति कर्मठ, ईमानदार और लक्ष्य-प्रधान होता है।

उदाहरण के तौर पर, जिन लोगों की कुंडली में मंगल दसवें भाव में होता है, वे जीवन में ऊँचे पदों तक पहुँचते हैं — जैसे सेना अधिकारी, पुलिस प्रमुख, इंजीनियर या सफल उद्यमी।
सूर्य और बुध के साथ मंगल का संयोजन व्यक्ति को सम्मान, प्रसिद्धि और धन देता है। शुभ मंगल व्यक्ति को आत्मविश्वासी बनाता है और उसे कठिन परिस्थितियों में भी आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है।

मंगल ग्रह से होने वाली बीमारियाँ

ज्योतिष शास्त्र में मंगल ग्रह को ऊर्जा, रक्त, साहस और शरीर की शक्ति का कारक माना गया है। जब जन्म कुंडली में मंगल ग्रह शुभ स्थिति में होता है, तो व्यक्ति में जोश, आत्मविश्वास और उत्तम स्वास्थ्य बना रहता है।

लेकिन यदि मंगल ग्रह पीड़ित या कमजोर हो जाए, तो यह कई प्रकार की शारीरिक और मानसिक बीमारियाँ उत्पन्न करता है।

नीचे विस्तार से जानिए कि मंगल ग्रह कमजोर होने पर कौन-कौन सी बीमारियाँ और समस्याएँ हो सकती हैं।

1. रक्त संबंधी बीमारियाँ

मंगल का सीधा संबंध रक्त (Blood) से होता है। इसलिए जब यह ग्रह अशुभ स्थिति में आता है, तो व्यक्ति को खून से जुड़ी कई परेशानियाँ हो सकती हैं।

एनीमिया और रक्त की कमी

कमजोर मंगल के कारण शरीर में रक्त निर्माण धीमा हो जाता है, जिससे व्यक्ति को एनीमिया (Anemia) या खून की कमी जैसी समस्या होती है। इससे थकान, कमजोरी और चक्कर जैसी शिकायतें रहती हैं।

रक्तचाप

मंगल ऊर्जा और रक्त प्रवाह को नियंत्रित करता है। जब यह ग्रह अशुभ हो, तो व्यक्ति का रक्तचाप (Blood Pressure) असंतुलित हो जाता है। इससे हृदय रोग (Heart Diseases) या स्ट्रोक जैसी गंभीर स्थितियाँ भी उत्पन्न हो सकती हैं।

रक्त की अशुद्धि

अशुभ मंगल से खून में विषाक्तता या अशुद्धि बढ़ती है, जिसके कारण शरीर में फोड़े-फुंसी, स्किन इन्फेक्शन, पिंपल्स या बार-बार संक्रमण होने लगता है।

2. त्वचा और फोड़े-फुंसी से जुड़ी बीमारियाँ

मंगल अग्नि तत्व का ग्रह है। जब यह ग्रह संतुलित न हो, तो शरीर में अधिक गर्मी (Body Heat) और विषैले तत्व बनने लगते हैं।

इससे त्वचा पर दाने, जलन, फोड़े-फुंसी और एक्ने जैसी समस्याएँ होती हैं। उदाहरण के तौर पर, जिन लोगों की कुंडली में मंगल आठवें भाव में होता है, उन्हें अक्सर शरीर पर घाव या पिंपल्स की शिकायत रहती है।

3. मांसपेशी और जोड़ों की बीमारियाँ

मंगल शरीर की मांसपेशियों और हड्डियों का स्वामी माना जाता है। जब यह ग्रह कमजोर होता है, तो व्यक्ति की शारीरिक शक्ति कम हो जाती है।

गठिया और वात रोग

अशुभ मंगल से शरीर के जोड़ कमजोर हो जाते हैं, जिससे गठिया (Arthritis) या वात रोग (Vata-related problems) जैसी समस्याएँ बढ़ती हैं।

बार-बार चोट लगना

मंगल दुर्घटनाओं और चोटों का कारक ग्रह है। कमजोर मंगल वाले व्यक्ति को छोटी-बड़ी चोटें (Injuries) बार-बार लगती हैं।

4. गुर्दे और मूत्र संबंधी रोग

मंगल शरीर में आग और रक्त दोनों का संचालन करता है। जब यह ग्रह संतुलित नहीं होता, तो शरीर में विषैले तत्व जमा होने लगते हैं।

गुर्दे में पथरी

अशुभ मंगल के कारण शरीर में कैल्शियम और नमक का असंतुलन होता है, जिससे किडनी स्टोन बनने की संभावना बढ़ जाती है।

मूत्र संक्रमण

मंगल दोष से मूत्र नलिका में जलन या संक्रमण की शिकायत होती है। व्यक्ति को बार-बार पेशाब आने या दर्द होने जैसी समस्याएँ होती हैं।

5. नेत्र रोग

कमजोर मंगल का प्रभाव आँखों पर भी पड़ता है। जिन लोगों की कुंडली में मंगल पीड़ित होता है, उन्हें आँखों की कमजोरी, जलन या सूजन जैसी समस्याएँ होती हैं।

गंभीर स्थिति में व्यक्ति को एक आँख से दिखना बंद हो सकता है या दृष्टि बहुत कमजोर हो जाती है।

6. बुखार और संक्रमण

अशुभ मंगल शरीर में अधिक गर्मी और संक्रमण का संकेत देता है। इससे व्यक्ति को बार-बार बुखार, सिरदर्द, सूजन या इन्फेक्शन की समस्या होती है।

अगर मंगल लंबे समय तक अशुभ स्थिति में रहे, तो टायफाइड, मलेरिया या वायरल इन्फेक्शन जैसी बीमारियाँ बार-बार हो सकती हैं।

7. कैंसर और ट्यूमर जैसी गंभीर बीमारियाँ

कई ज्योतिषीय मतों के अनुसार, अत्यंत अशुभ मंगल शरीर की कोशिकाओं में असामान्यता पैदा करता है। इससे ट्यूमर, अल्सर या कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।

खासकर जब मंगल आठवें या बारहवें भाव में स्थित हो और राहु या केतु के साथ जुड़ा हो, तब इसका प्रभाव और भी गंभीर हो सकता है।

8. मानसिक तनाव और गुस्सा

मंगल केवल शरीर को नहीं, बल्कि मन को भी प्रभावित करता है। जब यह ग्रह पीड़ित होता है, तो व्यक्ति क्रोध, चिड़चिड़ापन, बेचैनी और तनाव से ग्रस्त रहता है।

कमजोर मंगल व्यक्ति को आवेग में निर्णय लेने पर मजबूर करता है, जिससे मानसिक शांति भंग होती है और रिश्तों में खटास आती है।

9. महिलाओं में प्रजनन संबंधी समस्याएँ (Reproductive Issues in Women)

मंगल ग्रह गर्भधारण और संतान सुख में भी अहम भूमिका निभाता है। जब मंगल ग्रह अशुभ होता है, तो महिलाओं को गर्भधारण में कठिनाई या बार-बार गर्भपात की समस्या हो सकती है।

कुछ मामलों में मासिक धर्म (Periods) की अनियमितता और हार्मोनल असंतुलन भी देखने को मिलता है। लाल किताब के अनुसार, यदि मंगल आठवें भाव में हो और राहु के साथ युति बनाए, तो संतान हानि की संभावना बढ़ जाती है।

10. पाचन और पेट संबंधी रोग (Digestive and Stomach Disorders)

मंगल अग्नि तत्व का ग्रह है, इसलिए यह पाचन तंत्र (Digestive System) से जुड़ा हुआ है। जब यह ग्रह संतुलित नहीं होता, तो व्यक्ति को अम्लपित्त (Acidity), गैस, अल्सर या पेट में जलन जैसी समस्याएँ होती हैं।

यदि मंगल पर शनि या राहु का प्रभाव हो, तो यह लंबे समय तक पेट दर्द और पाचन कमजोरी का कारण बन सकता है।

कमजोर मंगल के लक्षण

कमजोर मंगल के कई लक्षण आसानी से पहचाने जा सकते हैं। अगर कोई व्यक्ति बिना कारण गुस्से में रहता है, झगड़ालू स्वभाव का है या हर समय तनाव में दिखाई देता है, तो उसके मंगल की स्थिति ठीक नहीं मानी जाती।

ऐसे लोग आत्मविश्वास की कमी से जूझते हैं, बार-बार चोट खाते हैं और उनके कार्य अधूरे रह जाते हैं। विवाह, संतान या करियर से जुड़ी परेशानियाँ भी लगातार बनी रहती हैं।

इसलिए ऐसे लोगों को अपने स्वभाव में संयम रखना और क्रोध पर नियंत्रण जरूरी है।

मंगल ग्रह को मजबूत करने के उपाय

ज्योतिष शास्त्र और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कुछ सरल उपायों से मंगल ग्रह को मजबूत किया जा सकता है। इन उपायों का पालन करने से व्यक्ति जीवन में शांति, सफलता और आत्मविश्वास पा सकता है।

1. हनुमानजी की पूजा करें
मंगल ग्रह का सीधा संबंध भगवान हनुमान से है। मंगलवार के दिन हनुमान चालीसा, बजरंग बाण या सुंदरकांड का पाठ करें। इससे मंगल दोष शांत होता है और आत्मबल बढ़ता है।

2. मंगल मंत्र का जाप करें
मंगल को मजबूत करने के लिए “ॐ अंगारकाय नमः” या “ॐ क्रां क्रीं क्रौं सः भौमाय नमः” मंत्र का 108 बार जाप करें। इससे जीवन में सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है।

3. लाल वस्तुओं का दान करें
मंगलवार को लाल मसूर दाल, लाल कपड़ा, गुड़, तांबा या मीठी रोटी दान करना मंगल को बलवान बनाता है।

4. मूंगा रत्न धारण करें
मूंगा रत्न मंगल का प्रतीक है। इसे तांबे या सोने की अंगूठी में मंगलवार को धारण करें, परंतु ज्योतिषी की सलाह अवश्य लें।

5. तांबे के बर्तन से पानी पीएं
तांबे के पात्र में रखा पानी पीने से मंगल की ऊर्जा शरीर में संतुलित होती है और रक्त से जुड़ी बीमारियाँ कम होती हैं।

6. सेवा और दान करें
गाय को चारा देना, बंदरों को गुड़-चना खिलाना और जरूरतमंदों को लाल वस्त्र दान करना मंगल को प्रसन्न करता है।

7. घर का वास्तु संतुलित रखें
घर की पश्चिम दिशा को स्वच्छ रखें और उसमें लाल फूल या दीपक जलाएं। इससे मंगल का प्रभाव शुभ बनता है।

8. संयम और धैर्य रखें
मंगल दोष वाले व्यक्ति को जल्दबाजी या गुस्से से बचना चाहिए। नशा या व्यसन से दूर रहना भी बहुत जरूरी है।

मंगल और वैवाहिक जीवन

कुंडली में अशुभ मंगल होने से व्यक्ति “मंगलिक दोष” से प्रभावित हो सकता है। यह दोष वैवाहिक जीवन में तनाव, देरी या असामंजस्य लाता है।

लेकिन यदि सही उपाय किए जाएँ — जैसे हनुमान पूजा, मूंगा धारण या मंगल शांति यंत्र की स्थापना — तो यह दोष काफी हद तक समाप्त हो सकता है।

याद रखें — मंगल को मजबूत बनाने के तीन मूल मंत्र हैं: भक्ति, संयम और सेवा।
जो व्यक्ति इन सिद्धांतों का पालन करता है, उसके जीवन में मंगल ग्रह हमेशा शुभ और कल्याणकारी प्रभाव देता है।

निष्कर्ष

मंगल ग्रह केवल युद्ध या क्रोध का प्रतीक नहीं, बल्कि यह आत्मविश्वास, साहस और ऊर्जा का स्रोत है। शुभ मंगल व्यक्ति को सफलता, सम्मान और स्थिरता देता है, जबकि अशुभ मंगल जीवन में विवाद, बीमारी और अस्थिरता लाता है।

इसलिए जीवन में मंगल का संतुलन बनाए रखना बेहद जरूरी है।

नियमित पूजा, संयम, सेवा और सकारात्मक सोच से व्यक्ति मंगल के दुष्प्रभावों से मुक्त होकर अपनी ऊर्जा को सफलता की दिशा में बदल सकता है।

FAQs

मंगल को ठीक करने के क्या उपाय हैं?

मंगल ग्रह को मजबूत करने के लिए ज्योतिष में कई प्रभावी उपाय बताए गए हैं। मंगलवार के दिन हनुमानजी की पूजा करें, हनुमान चालीसा या बजरंग बाण का पाठ करें। “ॐ अंगारकाय नमः” मंत्र का जाप 108 बार करें। लाल मसूर, गुड़, तांबा या मूंगफली का दान करें। मूंगा रत्न धारण करें (ज्योतिषी की सलाह से) और तांबे के बर्तन में पानी पीएं। इन उपायों से मंगल के दोष कम होकर ग्रह शुभ फल देने लगता है।

मंगल दोष कितनी उम्र तक रहता है?

मंगल दोष स्थायी नहीं होता। इसकी अवधि व्यक्ति की कुंडली में ग्रहों की स्थिति पर निर्भर करती है। सामान्यतः 28 से 32 वर्ष की आयु के बाद मंगल दोष का प्रभाव धीरे-धीरे कम हो जाता है। हालांकि, यदि मंगल बहुत अधिक पीड़ित हो, तो इसके दुष्प्रभाव लंबे समय तक रह सकते हैं। नियमित पूजा और उपायों से इसका असर जल्दी समाप्त किया जा सकता है।

मंगल का दुश्मन कौन है?

ज्योतिष के अनुसार, मंगल ग्रह के शत्रु ग्रह बुध और शनि हैं। जब मंगल इन ग्रहों के साथ युति (संयोग) बनाता है, तो इसका शुभ प्रभाव कम हो जाता है। खासकर यदि मंगल शनि या राहु के साथ बैठा हो, तो यह अशुभ परिणाम देता है और व्यक्ति के स्वभाव में क्रोध, अस्थिरता और दुर्घटनाओं की संभावना बढ़ जाती है।

डिस्क्लेमर:
इस लेख में दी गई जानकारी वैदिक ज्योतिषीय सिद्धांतों और पारंपरिक मान्यताओं पर आधारित है। इसका उद्देश्य केवल सामान्य जानकारी और जागरूकता प्रदान करना है। इसे किसी चिकित्सीय या स्वास्थ्य संबंधी सलाह के रूप में न लें। किसी भी स्वास्थ्य समस्या के लिए हमेशा योग्य चिकित्सक से परामर्श अवश्य करें।

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