रसोई घर किस दिशा में होना चाहिए यह सवाल लगभग हर उस व्यक्ति के मन में आता है जो नया घर बनवा रहा है या अपनी रसोई को बेहतर बनाना चाहता है।
रसोई केवल खाना बनाने की जगह नहीं होती, बल्कि यह परिवार के स्वास्थ्य, ऊर्जा और सुख-शांति से गहराई से जुड़ी होती है। सही दिशा में बनी रसोई न सिर्फ भोजन को शुद्ध बनाती है, बल्कि घर के माहौल को भी सकारात्मक रखती है।
अगर आप जानना चाहते हैं कि वास्तु शास्त्र के अनुसार रसोई के लिए सबसे शुभ दिशा कौन-सी है, किन दिशाओं से बचना चाहिए और छोटी-छोटी बातों से रसोई को कैसे अधिक लाभकारी बनाया जा सकता है, तो आगे पढ़ते रहें।
नीचे आपको रसोई दिशा से जुड़े ऐसे आसान और उपयोगी रहस्य मिलेंगे, जो आपके घर और जीवन दोनों में बड़ा बदलाव ला सकते हैं।
रसोई घर किस दिशा में होना चाहिए (Which Direction Is Best for the Kitchen)

रसोई घर किस दिशा में होना चाहिए यह समझना इसलिए जरूरी है क्योंकि रसोई सीधे अग्नि तत्व से जुड़ी होती है। वास्तु शास्त्र के अनुसार रसोई के लिए सबसे उत्तम दिशा दक्षिण-पूर्व मानी जाती है, जिसे अग्नि कोण कहा जाता है।
इस दिशा में रसोई होने से भोजन शुद्ध रहता है और घर में ऊर्जा का संतुलन बना रहता है। यदि दक्षिण-पूर्व दिशा उपलब्ध न हो, तो उत्तर-पश्चिम दिशा को दूसरा अच्छा विकल्प माना जाता है।
वहीं उत्तर, उत्तर-पूर्व और दक्षिण-पश्चिम दिशा में रसोई बनाने से बचने की सलाह दी जाती है, क्योंकि ये दिशाएं रसोई के स्वभाव से मेल नहीं खातीं।
सही दिशा में बनी रसोई परिवार के स्वास्थ्य, शांति और समृद्धि को सहयोग देती है, इसलिए दिशा का चुनाव सोच-समझकर करना चाहिए।
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रसोई का सही स्थान
रसोई का स्थान तय करना किचन वास्तु का सबसे महत्वपूर्ण भाग माना जाता है क्योंकि यह सीधे अग्नि तत्व से जुड़ा होता है।
वास्तु शास्त्र में पांच तत्वों में अग्नि का स्थान विशेष है और भोजन पकाने की जगह होने के कारण रसोई में इसका प्रभाव सबसे अधिक होता है।
इसी कारण रसोई के लिए सबसे उत्तम दिशा दक्षिण-पूर्व मानी गई है, जिसे अग्नि कोण भी कहा जाता है। इस दिशा में रसोई होने से भोजन शुद्ध रहता है, पाचन अच्छा होता है और घर में ऊर्जा संतुलित बनी रहती है।
उदाहरण के तौर पर, जिन घरों में दक्षिण-पूर्व दिशा में किचन होता है, वहां अक्सर परिवार के सदस्य स्वस्थ और सक्रिय रहते हैं।
यदि किसी कारणवश दक्षिण-पूर्व दिशा में रसोई बनाना संभव न हो, तो उत्तर-पश्चिम दिशा को दूसरा अच्छा विकल्प माना जाता है।
लेकिन वास्तु के अनुसार उत्तर, उत्तर-पूर्व और दक्षिण-पश्चिम दिशा में रसोई बनाने से बचना चाहिए। खासकर उत्तर-पूर्व दिशा, जिसे ईशान कोण कहा जाता है, पूजा और जल तत्व से जुड़ी होती है।
यहां रसोई होने से मानसिक तनाव और स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं बढ़ सकती हैं। इसके अलावा किचन और बाथरूम को एक साथ या आमने-सामने रखना भी किचन वास्तु दोष माना जाता है, क्योंकि इससे नकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है।
रसोई का प्रवेश द्वार
रसोई का प्रवेश द्वार घर की ऊर्जा को नियंत्रित करने में अहम भूमिका निभाता है। वास्तु शास्त्र के अनुसार किचन का दरवाजा उत्तर या पश्चिम दिशा में होना शुभ माना जाता है।
ये दिशाएं सकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित करती हैं और रसोई में स्वच्छ वातावरण बनाए रखती हैं। यदि ये दिशाएं संभव न हों, तो दक्षिण-पूर्व दिशा में भी प्रवेश द्वार बनाया जा सकता है।
दरवाजे की बनावट और खुलने की दिशा भी महत्वपूर्ण है। किचन का दरवाजा दक्षिणावर्त यानी घड़ी की दिशा में खुलना चाहिए।
ऐसा माना जाता है कि इससे समृद्धि और प्रगति के अवसर बढ़ते हैं। बहुत अधिक दरवाजे या आमने-सामने दो दरवाजे रसोई में नहीं होने चाहिए, क्योंकि इससे ऊर्जा का प्रवाह असंतुलित हो जाता है और परिवार में तनाव बढ़ सकता है।
गैस चूल्हा और खाना बनाने की दिशा

किचन में गैस चूल्हा अग्नि तत्व का प्रतिनिधित्व करता है और इसका सही स्थान बेहद जरूरी होता है। वास्तु के अनुसार गैस चूल्हा हमेशा रसोई के दक्षिण-पूर्व कोने में रखना चाहिए।
इससे अग्नि तत्व संतुलित रहता है और भोजन बनाते समय सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है। खाना पकाते समय व्यक्ति का मुख पूर्व दिशा की ओर होना चाहिए, क्योंकि पूर्व दिशा सूर्य की ऊर्जा से जुड़ी होती है।
उदाहरण के लिए, जब गृहिणी या कोई भी सदस्य पूर्व की ओर मुख करके खाना बनाता है, तो भोजन में सकारात्मकता और शुद्धता बढ़ती है।
गैस चूल्हे के सामने या बहुत पास सिंक, पानी का नल या फ्रिज नहीं होना चाहिए। आग और पानी को वास्तु में विरोधी तत्व माना गया है। इन्हें पास रखने से स्वास्थ्य समस्याएं, चिड़चिड़ापन और पारिवारिक मतभेद बढ़ सकते हैं।
खिड़कियां और वेंटिलेशन
रसोई में खिड़कियों और वेंटिलेशन का होना केवल सुविधा नहीं, बल्कि वास्तु की दृष्टि से भी बहुत आवश्यक है। खिड़कियों से सूर्य का प्रकाश और ताजी हवा आती है, जो रसोई के वातावरण को शुद्ध और सकारात्मक बनाती है।
वास्तु के अनुसार किचन की खिड़कियां पूर्व या दक्षिण दिशा में होनी चाहिए ताकि सूर्य की किरणें आसानी से अंदर आ सकें।
यदि रसोई में दो खिड़कियां हों, तो क्रॉस वेंटिलेशन का ध्यान रखना चाहिए। इससे खाना बनाते समय निकलने वाला धुआं बाहर चला जाता है और रसोई में नमी या बदबू नहीं रहती।
अच्छी रोशनी और हवा न केवल रसोई को स्वास्थ्यप्रद बनाती है, बल्कि वहां काम करने का मन भी खुश रहता है।
रसोई स्लैब और उसका रंग
रसोई का स्लैब मजबूत, टिकाऊ और साफ-सुथरा होना चाहिए। वास्तु के अनुसार स्लैब का रंग रसोई की दिशा के अनुसार चुनना बहुत लाभदायक होता है।
उदाहरण के लिए, यदि रसोई पूर्व दिशा में है, तो हरे या भूरे रंग का स्लैब अच्छा माना जाता है क्योंकि ये रंग प्रकृति और संतुलन का प्रतीक हैं।
उत्तर-पूर्व दिशा में रसोई होने पर पीले रंग का स्लैब शुभ माना जाता है। दक्षिण या दक्षिण-पूर्व दिशा की रसोई के लिए भूरे, मैरून या हरे रंग की सलाह दी जाती है।
पश्चिम दिशा में बनी रसोई के लिए भूरे या हल्के पीले रंग का स्लैब उपयुक्त रहता है। बहुत गहरे या बहुत चमकीले रंग रसोई में प्रयोग करने से बचना चाहिए, क्योंकि ये वातावरण को भारी बना सकते हैं।
रसोई सिंक और पानी की व्यवस्था

रसोई में सिंक जल तत्व का प्रतिनिधित्व करता है और इसका सही स्थान बहुत जरूरी होता है। वास्तु के अनुसार सिंक को उत्तर या उत्तर-पूर्व दिशा में रखना सबसे अच्छा माना जाता है।
सिंक और गैस चूल्हे के बीच पर्याप्त दूरी होनी चाहिए ताकि आग और पानी तत्व आपस में टकराएं नहीं। यदि जगह की कमी के कारण ऐसा संभव न हो, तो इनके बीच कोई पौधा या सजावटी वस्तु रखकर नकारात्मक प्रभाव को कम किया जा सकता है।
पीने के पानी की व्यवस्था भी किचन के अंदर ही होनी चाहिए। उत्तर-पूर्व या उत्तर दिशा में रखा गया पीने का पानी परिवार के स्वास्थ्य और मानसिक शांति को बढ़ाता है।
रसोई उपकरणों का सही स्थान
आज की आधुनिक रसोई में फ्रिज, माइक्रोवेव, ओवन और अन्य बिजली के उपकरण आम हो गए हैं। किचन वास्तु के अनुसार फ्रिज को दक्षिण-पश्चिम या पश्चिम दिशा में रखना शुभ माना जाता है। इसे कभी भी उत्तर-पूर्व दिशा में नहीं रखना चाहिए।
सभी विद्युत उपकरणों को अग्नि कोण यानी दक्षिण-पूर्व दिशा में रखना बेहतर होता है। इससे उपकरण सही तरीके से काम करते हैं और जल्दी खराब नहीं होते।
रसोई को हमेशा साफ और व्यवस्थित रखना चाहिए। बर्तनों और सामान को दक्षिण या पश्चिम दिशा की अलमारी में रखना सकारात्मक ऊर्जा को बढ़ाता है।
रसोई के रंग
रसोई के रंग मन और वातावरण पर गहरा प्रभाव डालते हैं। वास्तु शास्त्र के अनुसार किचन के लिए हल्के और सौम्य रंग सबसे अच्छे माने जाते हैं।
हल्का हरा, हल्का गुलाबी, नारंगी, क्रीम और सफेद रंग रसोई में सकारात्मकता लाते हैं और खाना बनाते समय मन को शांत रखते हैं।
बहुत गहरे रंग जैसे काला या गहरा नीला रसोई में प्रयोग करने से बचना चाहिए, क्योंकि ये रंग भारीपन और नकारात्मकता बढ़ा सकते हैं।
निष्कर्ष
घर की रसोई केवल भोजन पकाने की जगह नहीं, बल्कि परिवार के स्वास्थ्य, ऊर्जा और समृद्धि का केंद्र होती है।
सही किचन वास्तु, उचित दिशा, संतुलित रंग और सही व्यवस्था से घर में सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है। रसोई वास्तु के नियम अपनाकर हम न केवल बीमारियों से बच सकते हैं, बल्कि सुख-शांति, आर्थिक स्थिरता और पारिवारिक सामंजस्य भी बढ़ा सकते हैं।
इस प्रकार रसोई वास्तु को समझकर और अपनाकर हम अपनी रसोई को वास्तव में मां अन्नपूर्णा का पवित्र स्थान बना सकते हैं।
FAQs
घर में किचन का मुंह किधर होना चाहिए?
वास्तु शास्त्र के अनुसार, रसोईघर में खाना बनाते समय व्यक्ति का मुंह पूर्व दिशा की ओर होना सबसे शुभ माना जाता है। इससे सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है और स्वास्थ्य अच्छा रहता है।
रसोईघर का दरवाजा किस दिशा में होना चाहिए?
रसोईघर का दरवाजा पूर्व, उत्तर या उत्तर-पूर्व दिशा में होना श्रेष्ठ माना जाता है। दक्षिण या दक्षिण-पश्चिम दिशा में दरवाजा वास्तु दोष उत्पन्न कर सकता है।
सीढ़ी पर चढ़ते समय मुंह किधर होना चाहिए?
सीढ़ियाँ चढ़ते समय व्यक्ति का मुंह पूर्व या उत्तर दिशा की ओर होना शुभ होता है। दक्षिण या पश्चिम की ओर चढ़ती सीढ़ियाँ नकारात्मक प्रभाव डाल सकती हैं।

विजय वर्मा वैदिक ज्योतिष (Vedic Astrology) और रत्न विज्ञान (Gemstone Science) में 20+ वर्षों का अनुभव रखते हैं। उन्होंने 10,000 से अधिक कुंडलियों (Horoscopes) का विश्लेषण किया है और व्यक्तिगत व पेशेवर उन्नति के लिए सटीक मार्गदर्शन प्रदान किया है। उनका अनुभव उन्हें एक भरोसेमंद ज्योतिष विशेषज्ञ बनाता है।