मंगल दोष दूर करने के लिए कौन सा मंत्र है? यह सवाल हर उस व्यक्ति के मन में आता है जो कुंडली में मंगल दोष की वजह से विवाह, करियर या मानसिक तनाव जैसी परेशानियों से जूझ रहा है।
ज्योतिष शास्त्र में मंगल ग्रह को शक्ति, साहस और ऊर्जा का प्रतीक माना गया है, लेकिन जब यही ग्रह कुंडली में अशुभ हो जाता है, तो जीवन में रुकावटें आने लगती हैं। ऐसे में सही मंत्र का चुनाव बेहद जरूरी हो जाता है।
अक्सर लोग सोचते हैं कि क्या सिर्फ एक मंत्र से मंगल दोष शांत हो सकता है, या फिर किस मंत्र का जाप सबसे ज्यादा प्रभावी होता है। इस विषय में सही जानकारी न होने के कारण कई लोग भ्रमित रहते हैं।
अगर आप भी जानना चाहते हैं कि मंगल दोष दूर करने के लिए कौन सा मंत्र सबसे असरदार माना जाता है, उसे कब और कैसे जपना चाहिए, और उससे जीवन में क्या बदलाव आ सकते हैं, तो आगे पढ़ना आपके लिए बहुत उपयोगी रहेगा।
नीचे आपको मंगल दोष निवारण से जुड़े ऐसे महत्वपूर्ण मंत्र, उनकी सरल विधि और वास्तविक लाभों की जानकारी मिलेगी, जिससे आप खुद समझ पाएंगे कि कौन सा मंत्र आपके लिए सही है और कैसे यह आपके जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकता है।
मंगल दोष दूर करने के लिए कौन सा मंत्र है? (Mantra to Remove Mangal Dosha)

जब कुंडली में मंगल दोष होता है, तो सबसे पहले लोगों के मन में यही सवाल आता है कि आखिर कौन सा मंत्र जपना चाहिए जिससे इस दोष का प्रभाव कम हो सके।
ज्योतिष शास्त्र में मंगल ग्रह को शांत करने के लिए कई मंत्र बताए गए हैं, लेकिन उनमें से कुछ मंत्र ऐसे हैं जो सरल होने के साथ-साथ अत्यंत प्रभावी भी माने जाते हैं।
मंगल दोष दूर करने के लिए सबसे अधिक प्रचलित और सुरक्षित मंत्र मंगल बीज मंत्र माना जाता है। यह मंत्र मंगल ग्रह की नकारात्मक ऊर्जा को शांत करता है और व्यक्ति के स्वभाव में संतुलन लाने में मदद करता है।
यह भी पढ़ें:
- मांगलिक दोष कितने प्रकार का होता है
- अंगारक दोष के लक्षण और उपाय
- कुंडली में मंगल दोष शुभ या अशुभ
- ग्रहों को शांत करने के उपाय
मंगल दोष क्या है?
मंगल दोष को समझना इसलिए जरूरी है ताकि व्यक्ति यह जान सके कि उसके जीवन में आ रही परेशानियों की जड़ क्या हो सकती है।
ज्योतिष के अनुसार कुंडली में कुल 12 भाव होते हैं, जो जीवन के अलग-अलग क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करते हैं। यदि मंगल ग्रह इनमें से कुछ विशेष भावों में स्थित हो, तो व्यक्ति को मांगलिक माना जाता है।
जब मंगल ग्रह पहले, दूसरे, चौथे, सातवें, आठवें या बारहवें भाव में होता है, तब मंगल दोष बनता है। कुछ ज्योतिषी दूसरे भाव को भी मंगल दोष में शामिल करते हैं क्योंकि यह परिवार और वाणी से जुड़ा होता है।
मांगलिक दोष होने पर अक्सर विवाह में देरी होती है, सही जीवनसाथी मिलने में बाधा आती है या शादी के बाद पति-पत्नी के बीच तनाव, झगड़े और गलतफहमियां बढ़ जाती हैं।
उदाहरण के तौर पर, यदि किसी व्यक्ति की कुंडली में मंगल सातवें भाव में हो, तो विवाह के बाद गुस्सा, अहंकार और टकराव की स्थिति बन सकती है।
वहीं आठवें भाव का मंगल अचानक समस्याएं, दुर्घटनाएं और मानसिक दबाव बढ़ा सकता है। इसी कारण मंगल दोष का समय रहते निवारण करना बहुत जरूरी माना गया है।
मंगल दोष निवारण मंत्र क्यों जरूरी हैं?
मंगल दोष निवारण मंत्र केवल धार्मिक कर्मकांड नहीं हैं, बल्कि ये मानसिक और ऊर्जा स्तर पर भी असर डालते हैं।
मंत्र जाप से मंगल ग्रह की नकारात्मक ऊर्जा धीरे-धीरे शांत होती है और उसकी सकारात्मक शक्ति सक्रिय होने लगती है। नियमित मंत्र साधना व्यक्ति के स्वभाव में भी बदलाव लाती है।
मंगल दोष निवारण मंत्रों के नियमित जाप से मंगल दोष का प्रभाव कम होता है, वैवाहिक जीवन में मधुरता आती है, आत्मविश्वास और धैर्य बढ़ता है, करियर और व्यापार में स्थिरता आती है और मानसिक तनाव से राहत मिलती है।
कई लोग अनुभव करते हैं कि मंत्र जाप शुरू करने के कुछ समय बाद उनका गुस्सा कम होने लगता है और फैसले लेने की क्षमता बेहतर हो जाती है।
मंगल दोष निवारण के प्रमुख मंत्र
मंगल दोष को शांत करने के लिए कई प्रभावशाली मंत्र बताए गए हैं। इनमें से कुछ मंत्र सरल हैं और कुछ विशेष साधना के लिए उपयोग किए जाते हैं। नीचे दिए गए मंत्र सबसे अधिक प्रचलित और प्रभावी माने जाते हैं।
मंगल ग्रह प्रार्थना मंत्र
यह मंत्र मंगल ग्रह की शांति और कृपा प्राप्त करने के लिए किया जाता है। यह उन लोगों के लिए विशेष रूप से लाभकारी है जिनकी कुंडली में मंगल कमजोर है।
ॐ धरणीगर्भसंभूतं विद्युत्कान्तिसमप्रभम्।
कुमारं शक्तिहस्तं तं मंगलं प्रणमाम्यहम्।।
इस मंत्र के जाप से मंगल के अशुभ प्रभाव कम होते हैं, कुंडली में मंगल की स्थिति मजबूत होती है और व्यक्ति के भीतर साहस, ऊर्जा और आत्मबल बढ़ता है। उदाहरण के लिए, जो लोग बार-बार असफलता से डर जाते हैं, उनके लिए यह मंत्र आत्मविश्वास बढ़ाने में सहायक होता है।
मंगल गायत्री मंत्र
मंगल गायत्री मंत्र मंगल ग्रह की सकारात्मक ऊर्जा को बढ़ाने वाला मंत्र माना जाता है। यह मानसिक संतुलन और करियर स्थिरता के लिए उपयोगी है।
ॐ क्षिति पुत्राय विद्महे लोहितांगाय धीमहि।
तन्नो भौमः प्रचोदयात्।।
इस मंत्र के नियमित जाप से करियर में रुकावटें कम होती हैं, आत्मविश्वास बढ़ता है और मन में सकारात्मक सोच विकसित होती है। प्रतियोगी परीक्षाओं या नौकरी से जुड़े तनाव में यह मंत्र विशेष लाभ देता है।
मंगल बीज मंत्र
यह मंत्र मंगल दोष के गहरे और पुराने प्रभावों को कम करने के लिए किया जाता है। यह क्रोध और आक्रामकता को नियंत्रित करने में मदद करता है।
ॐ क्रां क्रीं क्रौं सः भौमाय नमः।
इस मंत्र के जाप से गुस्सा कम होता है, दुर्घटनाओं से सुरक्षा मिलती है और वैवाहिक समस्याओं में राहत मिलती है। जिन लोगों को बार-बार चोट लगती है या विवादों में फंसने की आदत होती है, उनके लिए यह मंत्र उपयोगी माना जाता है।
मंगल नाम मंत्र
इस मंत्र में मंगल ग्रह के विभिन्न नामों का स्मरण किया जाता है। यह सरल होते हुए भी बहुत प्रभावी माना जाता है।
ॐ अं अंगारकाय नमः।
ॐ भौं भौमाय नमः।
इस मंत्र के जाप से मानसिक तनाव कम होता है, जीवन में सुख-समृद्धि आती है और मंगल दोष का प्रभाव धीरे-धीरे कम होने लगता है।
मंगल दोष निवारण के अन्य मंत्र
मंगल दोष शांति के लिए कुछ वैदिक और तांत्रिक मंत्र भी बताए गए हैं, जिनका जाप अनुभवी मार्गदर्शन में करना अधिक लाभकारी होता है।
मंगल वैदिक मंत्र
ॐ अग्निमूर्धादिवः ककुत्पतिः पृथिव्याअयम्।
अपां रेता सि जिन्वति।
मंगल तांत्रिक मंत्र
ॐ हां हंसः खं खः
ॐ हूं श्रीं मंगलाय नमः
मंगल एकाक्षरी बीज मंत्र
ॐ अं अंगारकाय नमः
ॐ भौं भौमाय नमः
मंत्र जाप की सही विधि

मंत्र जाप से पूरा लाभ पाने के लिए सही विधि का पालन करना बहुत जरूरी है। मंत्र जाप मंगलवार के दिन करना सबसे उत्तम माना जाता है।
सूर्योदय के बाद या संध्या के समय जाप करना लाभकारी होता है। स्नान करके लाल या केसरिया वस्त्र पहनें और पूजा स्थान को साफ रखें।
मंत्र जाप के लिए चंदन या तुलसी की माला का उपयोग करें और प्रत्येक मंत्र का कम से कम 108 बार जाप करें। जाप के दौरान मन शांत और एकाग्र होना चाहिए, क्योंकि मंत्र की शक्ति श्रद्धा और एकाग्रता से ही सक्रिय होती है।
मंगल दोष निवारण के नियम
मंत्र जाप से पहले शुद्धता का ध्यान रखें और सात्विक भोजन करें। मांस, शराब, लहसुन और प्याज से बचें। शांत और एकांत स्थान पर जाप करें और नियमितता बनाए रखें। नियमों का पालन करने से मंत्र अधिक प्रभावी होते हैं।
मंगलवार और हनुमान जी की पूजा का महत्व

ज्योतिष शास्त्र में मंगलवार का दिन मंगल ग्रह को समर्पित है। इस दिन हनुमान जी की पूजा करने से मंगल दोष शांत होता है। हनुमान चालीसा या बजरंग बाण का पाठ विशेष लाभ देता है।
लाल फूल, सिंदूर और गुड़ का दान करना भी मंगल दोष निवारण के लिए शुभ माना जाता है। हनुमान जी को मंगल ग्रह का नियंत्रक माना गया है, इसलिए उनकी पूजा से मंगल के अशुभ प्रभाव कम होते हैं।
निष्कर्ष
मंगल दोष कोई अभिशाप नहीं है, बल्कि यह जीवन में संतुलन की कमी का संकेत होता है। श्रद्धा, नियमित मंत्र जाप और सही विधि से मंगल दोष को शांत किया जा सकता है।
मंगल दोष निवारण मंत्र व्यक्ति के जीवन में शांति, संतुलन, आत्मविश्वास, सुखी वैवाहिक जीवन और करियर में प्रगति लाने में सहायक होते हैं।
सही मार्गदर्शन और धैर्य के साथ किया गया मंगल दोष निवारण व्यक्ति को एक सकारात्मक और स्थिर जीवन की ओर ले जाता है।
FAQs
मांगलिक दोष कितनी उम्र तक रहता है?
मांगलिक दोष उम्र के साथ अपने आप खत्म नहीं होता। यह जन्म कुंडली में मंगल की स्थिति पर आधारित होता है, इसलिए यह जीवनभर प्रभावी रह सकता है।
हालांकि, 28, 30 या 32 वर्ष की उम्र के बाद इसका प्रभाव कई मामलों में कमज़ोर हो जाता है, खासकर जब अन्य ग्रह शुभ स्थिति में हों।
मंगल दोष कैसे खत्म करें?
मंगल दोष को पूरी तरह समाप्त नहीं किया जा सकता, लेकिन इसके दुष्प्रभाव कम किए जा सकते हैं। प्रमुख उपाय हैं:
मांगलिक से ही विवाह करना
कुंडली मिलान
मंगल शांति पूजा या कुज दोष निवारण पूजा
हनुमान जी या मंगल ग्रह की उपासना
मंगल ग्रह खराब होने से कौन-सी बीमारी होती है?
ज्योतिष के अनुसार, कमजोर या अशुभ मंगल ग्रह से निम्न समस्याएं हो सकती हैं:
रक्त से जुड़ी बीमारियां
हाई ब्लड प्रेशर
बुखार, इंफेक्शन
एक्सीडेंट या चोट लगना
गुस्सा, चिड़चिड़ापन
मंगल शरीर में ऊर्जा, रक्त और मांसपेशियों का कारक माना जाता है।

विजय वर्मा वैदिक ज्योतिष (Vedic Astrology) और रत्न विज्ञान (Gemstone Science) में 20+ वर्षों का अनुभव रखते हैं। उन्होंने 10,000 से अधिक कुंडलियों (Horoscopes) का विश्लेषण किया है और व्यक्तिगत व पेशेवर उन्नति के लिए सटीक मार्गदर्शन प्रदान किया है। उनका अनुभव उन्हें एक भरोसेमंद ज्योतिष विशेषज्ञ बनाता है।