कुंडली में नौकरी योग कैसे देखें और सही समय के संकेत कैसे समझें

कुंडली में नौकरी योग कैसे देखें, यह सवाल बहुत से लोगों के मन में तब आता है जब मेहनत के बाद भी काम स्थिर नहीं हो रहा होता या बार-बार अवसर हाथ से निकल रहे होते हैं। ऐसे समय में जन्म कुंडली केवल भविष्य बताने का माध्यम नहीं होती, बल्कि यह व्यक्ति की क्षमता, कार्य दिशा, संघर्ष और सही समय के संकेत भी देती है।

सही समझ होने पर यह जाना जा सकता है कि नौकरी का योग है या नहीं, किस तरह की नौकरी अधिक अनुकूल रहेगी, और कब प्रयासों का फल मिलने की संभावना बढ़ती है।

कुंडली में नौकरी योग देखने के लिए मुख्य रूप से दशम भाव, षष्ठ भाव, लग्न, सूर्य, शनि, बुध और गुरु की स्थिति देखी जाती है। साथ ही दशा, अंतरदशा और गोचर यह बताते हैं कि नौकरी मिलने का समय कब मजबूत हो सकता है। केवल एक ग्रह नहीं, बल्कि पूरी कुंडली का संतुलित अध्ययन जरूरी होता है।

कुंडली में नौकरी योग कैसे देखें का ज्योतिष में क्या महत्व है (How to See Job Yoga in Horoscope)

कुंडली में नौकरी योग कैसे देखें का ज्योतिष में क्या महत्व है

नौकरी का योग समझने के लिए सबसे पहले यह जानना जरूरी है कि कुंडली में काम, सेवा, पद, जिम्मेदारी और आजीविका को किन भावों और ग्रहों से देखा जाता है।

बहुत लोग केवल दशम भाव देखकर निष्कर्ष निकाल लेते हैं, जबकि नौकरी का सही निर्णय कई संकेतों को जोड़कर ही किया जाता है।

कुंडली यह बताती है कि व्यक्ति नौकरी के लिए बना है, व्यापार के लिए अधिक अनुकूल है, या दोनों में समय के अनुसार अवसर मिल सकते हैं। यही कारण है कि नौकरी योग देखने में जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए।

दशम भाव क्यों सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है

दशम भाव कर्म, पेशा, पद, प्रतिष्ठा और बाहरी दुनिया में आपकी भूमिका को दिखाता है। यदि यह भाव मजबूत हो, उसका स्वामी शुभ स्थिति में हो, और उस पर अच्छे ग्रहों का प्रभाव हो, तो व्यक्ति को काम के क्षेत्र में स्थिरता और पहचान मिलती है।

लेकिन एक जरूरी बात यहां समझनी चाहिए। दशम भाव मजबूत होने का अर्थ हमेशा सरकारी या बड़ी नौकरी नहीं होता। इसका अर्थ यह भी हो सकता है कि व्यक्ति अपने काम से सम्मान पाए, जिम्मेदारी संभाले और समाज में उपयोगी भूमिका निभाए।

षष्ठ भाव नौकरी और सेवा का संकेत कैसे देता है

षष्ठ भाव को सेवा, प्रतियोगिता, मेहनत, अनुशासन और दैनिक कार्य से जोड़ा जाता है। नौकरी पाने के लिए यह भाव बहुत महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि नौकरी में केवल पद नहीं, बल्कि नियमित मेहनत, नियमों का पालन और संघर्ष भी शामिल होते हैं।

यदि षष्ठ भाव अच्छा हो, उसका स्वामी बलवान हो, और शनि या बुध से सहयोग मिले, तो व्यक्ति नौकरी वाले ढांचे में बेहतर काम कर सकता है। ऐसे लोग नियमित दिनचर्या और जिम्मेदारी वाले काम में अच्छा प्रदर्शन करते हैं।

लग्न और लग्नेश की भूमिका

लग्न व्यक्ति का स्वभाव, ऊर्जा, निर्णय क्षमता और जीवन की दिशा बताता है। नौकरी योग तभी सही फल देता है जब व्यक्ति की आंतरिक क्षमता भी उसके साथ हो। कमजोर लग्न होने पर अच्छे योग भी देर से फल दे सकते हैं, क्योंकि व्यक्ति में आत्मविश्वास, निरंतरता या सही दिशा की कमी आ सकती है।

इसीलिए केवल नौकरी का योग देखना काफी नहीं है। यह भी देखना होता है कि व्यक्ति अवसर को संभाल पाएगा या नहीं।

नौकरी योग देखने में किन ग्रहों पर विशेष ध्यान देना चाहिए

कुंडली में नौकरी योग कैसे देखें का ज्योतिष में क्या महत्व है

ग्रह यह बताते हैं कि व्यक्ति किस तरह के काम में आगे बढ़ सकता है, किस प्रकृति की नौकरी उसे सूट करेगी, और कौन-सा ग्रह नौकरी मिलने में सहायक या बाधक बन रहा है।

नौकरी के मामले में सूर्य, शनि, बुध, गुरु, मंगल और चंद्रमा का विशेष महत्व होता है।

अक्सर लोग सोचते हैं कि केवल शनि नौकरी देता है। यह आधा सच है। शनि स्थिरता, मेहनत और सेवा देता है, लेकिन नौकरी का पूरा चित्र कई ग्रह मिलकर बनाते हैं।

सूर्य की भूमिका

सूर्य अधिकार, प्रशासन, नेतृत्व, सरकारी क्षेत्र और प्रतिष्ठा का कारक माना जाता है। यदि सूर्य मजबूत हो और दशम भाव, दशमेश या षष्ठ भाव से जुड़ जाए, तो व्यक्ति को प्रशासनिक, सरकारी या जिम्मेदारी वाले पदों की ओर अवसर मिल सकते हैं।

यदि सूर्य कमजोर हो, तो व्यक्ति में योग्यता होने पर भी आत्मप्रस्तुति कमजोर हो सकती है। कई बार इंटरव्यू में वही कमी दिखती है।

शनि की भूमिका

शनि नौकरी योग का सबसे गहरा ग्रह माना जाता है क्योंकि यह श्रम, अनुशासन, समय, व्यवस्था और धैर्य का प्रतीक है। शनि मजबूत होने पर नौकरी देर से मिल सकती है, लेकिन मिलने के बाद स्थिरता भी देता है।

यहां एक सामान्य गलतफहमी दूर करना जरूरी है। शनि की देरी को लोग बुरा मानते हैं, जबकि कई बार वही देरी व्यक्ति को परिपक्व बनाती है और बाद में अधिक स्थायी अवसर देती है। शनि जल्दी फल नहीं देता, पर बिना आधार के फल भी नहीं देता।

बुध और गुरु का योगदान

बुध बुद्धि, संचार, परीक्षा, लेखन, गणना, विश्लेषण और दफ्तर के कामों का कारक है। यदि बुध अच्छा हो तो व्यक्ति लिखित परीक्षा, इंटरव्यू, तर्क और तकनीकी समझ में अच्छा कर सकता है।

गुरु मार्गदर्शन, ज्ञान, विस्तार, सलाहकारी भूमिकाएं और सम्मानजनक पेशा देता है। गुरु का सहयोग व्यक्ति को समझदारी से सही अवसर चुनने में मदद करता है। कई बार नौकरी मिलना केवल योग का विषय नहीं, सही निर्णय का भी विषय होता है।

मंगल और चंद्रमा का प्रभाव

मंगल ऊर्जा, साहस, तकनीकी कार्य, पुलिस, सेना, इंजीनियरिंग, फील्ड वर्क और प्रतिस्पर्धा का ग्रह है। यदि नौकरी में तेज निर्णय, साहस या सक्रिय भूमिका चाहिए, तो मंगल का मजबूत होना लाभकारी माना जाता है।

चंद्रमा मन, भावनाएं और मानसिक स्थिरता दिखाता है। नौकरी में सफलता के लिए मन का संतुलन बहुत जरूरी है। चंद्रमा कमजोर हो तो व्यक्ति अवसर मिलने पर भी बेचैनी, अस्थिरता या बार-बार निर्णय बदलने की समस्या से जूझ सकता है।

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कुंडली में कौन से भाव नौकरी के लिए सबसे ज्यादा देखे जाते हैं

नौकरी योग को समझने में केवल एक भाव नहीं देखा जाता। दूसरे, छठे, दसवें और ग्यारहवें भाव का आपसी संबंध बहुत कुछ बताता है। इन भावों के मेल से पता चलता है कि आय, सेवा, कर्म और लाभ का ढांचा कितना मजबूत है।

जब ये भाव आपस में जुड़े हों, या इनके स्वामी शुभ स्थिति में हों, तो नौकरी मिलने और उससे लाभ पाने की संभावना मजबूत होती है।

दूसरा भाव और आय

दूसरा भाव कमाई, परिवार की जिम्मेदारी और आर्थिक स्थिरता से जुड़ा है। नौकरी मिलने के बाद नियमित आय का संकेत इसी भाव से देखा जाता है। यदि दूसरा भाव मजबूत हो, तो व्यक्ति अपनी कमाई को स्थिर रूप दे सकता है।

कई बार नौकरी का योग होता है, लेकिन आय स्थिर नहीं रहती। ऐसे मामलों में दूसरे भाव की कमजोरी दिखाई देती है।

छठा भाव और प्रतियोगिता

छठा भाव विशेष रूप से नौकरी, प्रतियोगी परीक्षा, प्रतिस्पर्धा और संघर्ष से जुड़ा होता है। जो लोग लंबे समय तक परीक्षा, इंटरव्यू या चयन प्रक्रिया से गुजरते हैं, उनकी कुंडली में इस भाव की भूमिका बहुत स्पष्ट होती है।

यदि छठा भाव शुभ प्रभाव में हो, तो व्यक्ति विरोध, दबाव और कठिन मेहनत के बीच भी आगे बढ़ता है। यही भाव बताता है कि नौकरी पाने के लिए संघर्ष कितना लंबा हो सकता है।

दशम भाव और कर्म क्षेत्र

दशम भाव काम की दिशा बताता है, लेकिन साथ ही यह भी दिखाता है कि व्यक्ति को किस प्रकार का कार्य वातावरण अनुकूल रहेगा।

किसी को प्रशासनिक काम, किसी को तकनीकी काम, किसी को शिक्षण, और किसी को निजी संस्था में बेहतर अवसर मिलते हैं।

ग्रह स्थिति (planet position) यहां बहुत सूक्ष्म संकेत देती है। केवल नौकरी होगी या नहीं, यही नहीं, बल्कि काम का स्वभाव भी इसी से समझ आता है।

ग्यारहवां भाव और सफलता का फल

ग्यारहवां भाव लाभ, इच्छापूर्ति, नेटवर्क और परिणाम का भाव है। नौकरी का प्रयास सफल होगा या नहीं, इसका एक महत्वपूर्ण आधार यही भाव है। मजबूत ग्यारहवां भाव यह दिखाता है कि व्यक्ति की मेहनत अंत में फल दे सकती है।

यदि दशम भाव अच्छा हो लेकिन ग्यारहवां भाव कमजोर हो, तो व्यक्ति काम तो करता है पर अपेक्षित लाभ या संतुष्टि नहीं मिलती।

नौकरी मिलने का समय कुंडली से कैसे समझें

बहुत लोग पूछते हैं कि नौकरी का योग है, लेकिन समय कब आएगा। यही वह जगह है जहां दशा, अंतरदशा और गोचर का महत्व बढ़ जाता है। योग होना एक बात है, उसका सक्रिय होना दूसरी बात।

कुंडली में कई योग छिपे रहते हैं, लेकिन वे सही समय आने पर ही फल देते हैं। इसलिए समय देखने के बिना नौकरी संबंधी भविष्यवाणी अधूरी रहती है।

दशा और अंतरदशा का महत्व

जिस ग्रह की दशा चल रही हो, यदि वह दशम भाव, षष्ठ भाव, दूसरे भाव या ग्यारहवें भाव से जुड़ा है, तो नौकरी की संभावना बढ़ती है। खासकर तब जब वह ग्रह शुभ हो या अपनी स्थिति के अनुसार फल देने में सक्षम हो।

उदाहरण के तौर पर, यदि दशमेश की दशा चले, या षष्ठेश और ग्यारहवें भाव का संबंध सक्रिय हो, तो नौकरी के प्रयासों में तेजी आ सकती है। कई बार पहले लंबे समय तक रुकावट रहती है, फिर अचानक अवसर बनने लगते हैं। यह अक्सर दशा परिवर्तन का असर होता है।

गोचर क्या संकेत देता है

गोचर (transit) यह दिखाता है कि वर्तमान समय में ग्रह आपकी जन्म कुंडली के किन हिस्सों को सक्रिय कर रहे हैं। जब शनि, गुरु या राहु-केतु महत्वपूर्ण भावों पर असर डालते हैं, तो नौकरी संबंधी घटनाएं तेज हो सकती हैं।

गुरु का अनुकूल गोचर अवसर, सहयोग और मार्गदर्शन देता है। शनि का प्रभाव मेहनत बढ़ाता है और परिणाम को ठोस बनाता है। दोनों का संतुलित सहयोग नौकरी मिलने के समय में अक्सर देखा जाता है।

समय निर्धारण में आम गलती

बहुत से लोग केवल एक महीने या एक तारीख पूछते हैं। ज्योतिष इतना यांत्रिक नहीं है। यह संभावना, समय का दायरा और परिस्थिति का संकेत देता है। सही अध्ययन में यह बताया जाता है कि कौन-सा समय अधिक सक्रिय है, किन महीनों में प्रयास तेज करने चाहिए, और कब धैर्य रखना बेहतर है।

यही वह सूक्ष्म बात है जिसे कई सामान्य लेख छोड़ देते हैं। नौकरी मिलने का समय केवल ग्रहों से नहीं, व्यक्ति के प्रयास, तैयारी और मानसिक स्थिति से भी जुड़ता है।

किन योगों से नौकरी की संभावना मजबूत होती है

नौकरी योग तब मजबूत माना जाता है जब कर्म, सेवा, आय और लाभ से जुड़े भाव आपस में संबंध बनाते हैं। शुभ ग्रहों का प्रभाव और भाव स्वामियों की स्थिति इस संभावना को स्थिर करती है।

यहां एक ही नियम सब पर लागू नहीं होता, फिर भी कुछ सामान्य संकेत बहुत उपयोगी माने जाते हैं।

दशमेश और षष्ठेश का संबंध

यदि दशमेश और षष्ठेश में संबंध हो, तो व्यक्ति नौकरी या सेवा क्षेत्र से जुड़ सकता है। यह संबंध युति, दृष्टि, राशि परिवर्तन या परस्पर भाव संबंध के रूप में हो सकता है।

ऐसे लोग प्रायः नियमित कार्य व्यवस्था में बेहतर काम करते हैं। यदि साथ में बुध या शनि सहयोग करें, तो नौकरी स्थिर होने की संभावना और बढ़ जाती है।

दूसरे, दसवें और ग्यारहवें भाव का मेल

जब आय, कर्म और लाभ के भाव एक-दूसरे से जुड़ते हैं, तो व्यक्ति को ऐसा काम मिलने की संभावना बढ़ती है जिससे कमाई भी हो और आगे प्रगति भी मिले। यह मेल नौकरी में वृद्धि, पदोन्नति या लंबे समय की स्थिरता भी दिखा सकता है।

जन्म कुंडली विश्लेषण (birth chart analysis) में इस मेल को बहुत ध्यान से देखा जाता है, क्योंकि यही वास्तविक फल की दिशा बताता है।

शुभ ग्रहों का प्रभाव

यदि दशम भाव या उसका स्वामी गुरु, बुध या मजबूत चंद्रमा के प्रभाव में हो, तो व्यक्ति को कार्यक्षेत्र में सहयोग, समझदारी और अच्छा वातावरण मिल सकता है। सूर्य और शनि का संतुलन जिम्मेदारी और स्थिरता देता है।

लेकिन केवल शुभ ग्रह होना पर्याप्त नहीं। यदि व्यक्ति की दशा साथ न दे, तो योग होने पर भी फल में देरी हो सकती है।

नौकरी योग होने पर भी नौकरी देर से क्यों मिलती है

यह सबसे व्यावहारिक प्रश्नों में से एक है। कई लोगों की कुंडली में नौकरी के संकेत होते हैं, फिर भी वर्षों तक संघर्ष चलता है। इसका कारण अक्सर कमजोर समय, शनि की देरी, चंद्रमा की अस्थिरता, या तैयारी और दिशा की कमी होती है।

ज्योतिष का उद्देश्य केवल यह कहना नहीं कि योग है। असली समझ यह है कि रुकावट कहां है।

शनि की देरी

शनि जब कर्म भावों से जुड़ता है, तो फल देर से देता है। लेकिन इस देरी में सीख छिपी होती है। व्यक्ति को अनुशासन, धैर्य और व्यावहारिकता सीखनी पड़ती है।

ऐसे लोग कई बार शुरुआती असफलताओं के बाद मजबूत बनते हैं। बाद में जो नौकरी मिलती है, वह अधिक स्थिर होती है।

राहु की उलझन

राहु अवसर भी देता है और भ्रम भी पैदा करता है। नौकरी के मामलों में राहु व्यक्ति को बार-बार दिशा बदलने, एक साथ बहुत कुछ चाहने या जल्द परिणाम पाने की बेचैनी दे सकता है।

वास्तविक जीवन में यह तब दिखता है जब कोई व्यक्ति हर कुछ महीनों में लक्ष्य बदल देता है। कुंडली में राहु का प्रभाव होने पर सही सलाह और धैर्य बहुत जरूरी होता है।

मन की अस्थिरता

यदि चंद्रमा कमजोर हो, तो व्यक्ति मेहनत के बावजूद टिक नहीं पाता। कभी तैयारी छूट जाती है, कभी आत्मविश्वास गिर जाता है, कभी दूसरों से तुलना करके निराशा बढ़ जाती है। नौकरी केवल योग का नहीं, मन के संतुलन का भी विषय है।

ऊर्जा संतुलन (energy balance) ठीक न हो तो अच्छे समय में भी व्यक्ति अवसर का पूरा लाभ नहीं उठा पाता।

नौकरी योग मजबूत करने के लिए क्या करें

कुंडली में नौकरी योग कैसे देखें का ज्योतिष में क्या महत्व है

ज्योतिषीय समझ का सही उपयोग तभी है जब वह जीवन में दिशा दे। नौकरी योग समझने के बाद व्यक्ति को अपने प्रयास, दिनचर्या और मानसिक दृष्टि पर काम करना चाहिए। यही व्यावहारिक उपाय सबसे अधिक फल देते हैं।

नियमितता और समय अनुशासन

यदि कुंडली में शनि महत्वपूर्ण हो, तो जीवन में नियम लाना बहुत जरूरी हो जाता है। रोज एक निश्चित समय पर पढ़ना, आवेदन करना, कौशल सुधारना और दिनचर्या बनाना नौकरी योग को सक्रिय करने में मदद करता है।

यह सुनने में साधारण लगता है, लेकिन शनि से जुड़े लोगों के लिए यही सबसे शक्तिशाली कदम होता है।

सही क्षेत्र का चुनाव

हर मजबूत दशम भाव सरकारी नौकरी ही नहीं देता। किसी की कुंडली निजी क्षेत्र, तकनीकी क्षेत्र, शिक्षण, प्रशासन, सलाहकारी कार्य या फील्ड जॉब के लिए अधिक अनुकूल हो सकती है। गलत दिशा में लगातार प्रयास करने से देरी बढ़ती है।

यहीं पर कुंडली की सूक्ष्म समझ सबसे अधिक उपयोगी होती है। सही दिशा मिल जाए तो वही योग जल्दी फल देने लगता है।

मानसिक स्पष्टता और धैर्य

जब व्यक्ति बार-बार असफलता देखता है, तो वह अपने योग पर ही शक करने लगता है। लेकिन कई बार समस्या योग की नहीं, समय की होती है। ऐसे में धैर्य, निरंतरता और स्पष्ट लक्ष्य बहुत जरूरी है।

कर्म दिशा (career path) तभी साफ होती है जब व्यक्ति भीतर से बिखरा न हो।

निष्कर्ष

कुंडली में नौकरी योग कैसे देखें, इसका उत्तर केवल एक भाव या एक ग्रह में नहीं छिपा होता। दशम भाव, षष्ठ भाव, दूसरा और ग्यारहवां भाव, साथ ही सूर्य, शनि, बुध, गुरु, मंगल और चंद्रमा मिलकर यह बताते हैं कि नौकरी की संभावना कितनी मजबूत है, किस प्रकार की नौकरी अनुकूल है और उसका समय कब सक्रिय हो सकता है।

सबसे जरूरी बात यह है कि कुंडली दिशा देती है, लेकिन परिणाम को स्थिर करने का काम व्यक्ति के धैर्य, तैयारी और सही निर्णय से होता है। इसलिए यदि आपकी कुंडली में नौकरी के संकेत हों, तो घबराने के बजाय उन्हें समझें, सही समय पहचानें और निरंतर प्रयास करते रहें। अक्सर वही लोग आगे बढ़ते हैं जो योग के साथ-साथ अपने कर्म को भी गंभीरता से लेते हैं।

FAQS

कुंडली में नौकरी योग कैसे देखें

कुंडली में नौकरी योग देखने के लिए दशम भाव, षष्ठ भाव, लग्न, दशमेश और शनि की स्थिति साथ में देखी जाती है। केवल एक ग्रह देखकर निष्कर्ष नहीं निकाला जाता। सही विश्लेषण में दशा, अंतरदशा और गोचर भी शामिल होते हैं, तभी नौकरी के अवसर और समय का बेहतर अंदाजा मिलता है।

कुंडली में नौकरी योग कौन देख सकता है?

कुंडली में नौकरी योग वही व्यक्ति ठीक से देख सकता है जिसे वैदिक ज्योतिष के भाव, ग्रह और दशा प्रणाली की अच्छी समझ हो। खासकर दशम भाव, षष्ठ भाव और शनि की भूमिका समझना जरूरी है। अनुभवहीन पढ़ाई अक्सर अधूरा निष्कर्ष देती है, इसलिए संतुलित विश्लेषण जरूरी माना जाता है।

नौकरी योग में कौन से ग्रह सबसे जरूरी हैं?

नौकरी योग में शनि, सूर्य, बुध, गुरु और मंगल सबसे ज्यादा देखे जाते हैं। शनि सेवा और अनुशासन दिखाता है, सूर्य अधिकार और पद, बुध परीक्षा और बुद्धि, गुरु मार्गदर्शन, और मंगल प्रतियोगिता व सक्रियता का संकेत देता है। इन ग्रहों का दशम भाव से संबंध नौकरी की संभावना को मजबूत कर सकता है।

नौकरी योग में दशम भाव क्या बताता है?

नौकरी योग में दशम भाव व्यक्ति के कर्म, पेशे, पद और काम की दिशा को बताता है। वैदिक ज्योतिष में इसे करियर का मुख्य भाव माना जाता है। अगर दशम भाव या उसका स्वामी मजबूत हो, तो व्यक्ति को काम में पहचान, जिम्मेदारी और स्थिर अवसर मिलने की संभावना बढ़ती है।

कुंडली में नौकरी योग देर से क्यों फल देता है?

कुंडली में नौकरी योग देर से फल देने का एक बड़ा कारण शनि का प्रभाव, कमजोर दशा या गलत दिशा में प्रयास हो सकता है। शनि अक्सर जल्दी नहीं, बल्कि परिपक्व समय पर फल देता है। इसी वजह से कई लोगों को 28 से 36 वर्ष के बीच अधिक स्थिर नौकरी अवसर मिलते देखे जाते हैं।

क्या नौकरी योग केवल सरकारी नौकरी बताता है?

नहीं, नौकरी योग केवल सरकारी नौकरी नहीं बताता, बल्कि सेवा, निजी नौकरी, प्रशासनिक काम, तकनीकी क्षेत्र या संस्थागत कार्य भी दिखा सकता है। उदाहरण के लिए मजबूत सूर्य सरकारी या प्रशासनिक संकेत दे सकता है, जबकि मजबूत बुध और शनि निजी नौकरी, दफ्तर या विश्लेषण वाले काम की ओर संकेत कर सकते हैं।

कुंडली में नौकरी का सही समय कौन बताता है?

कुंडली में नौकरी का सही समय मुख्य रूप से दशा, अंतरदशा और गोचर बताते हैं। केवल योग होना काफी नहीं होता, उसका सक्रिय समय भी जरूरी होता है। जब दशमेश, षष्ठेश या ग्यारहवें भाव से जुड़े ग्रहों की दशा चलती है, तब नौकरी मिलने की संभावना सामान्य से अधिक मजबूत मानी जाती है।

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