मांगलिक कितने प्रकार के होते हैं? यह सवाल अक्सर उन लोगों के मन में आता है जो विवाह से पहले कुंडली मिलान करते हैं।
ज्योतिष शास्त्र में मांगलिक दोष को बहुत महत्वपूर्ण माना गया है, क्योंकि यह विवाह में आने वाली रुकावटों का एक बड़ा कारण हो सकता है।
लेकिन क्या आप जानते हैं कि मांगलिक दोष केवल एक ही प्रकार का नहीं होता? इसके अलग-अलग स्तर और प्रकार होते हैं, जिनका असर भी अलग-अलग होता है।
अगर आप जानना चाहते हैं कि ये कौन-कौन से प्रकार हैं, इनमें क्या अंतर है और क्यों इन्हें समझना जरूरी है, तो आगे पढ़ते रहिए।
इस जानकारी से आप न केवल मांगलिक दोष को बेहतर तरीके से समझ पाएंगे, बल्कि इसके समाधान के बारे में भी जानेंगे।
मांगलिक कितने प्रकार के होते हैं? (How Many Types of Manglik Dosha Are There?)

मांगलिक दोष कई स्तरों पर बनता है, जिसका असर भी अलग-अलग होता है।
1. सामान्य मांगलिक कुंडली – मंगल केवल 1, 4, 7, 8 या 12वें भाव में हो।
2. द्विबल मांगलिक कुंडली – जब मंगल उपरोक्त भावों में होने के साथ कर्क राशि में नीच का हो या इन भावों में शनि, राहु, केतु या सूर्य मौजूद हों।
3. त्रिबल मांगलिक कुंडली – मंगल के साथ इन भावों में राहु, केतु और शनि भी हों। यह सबसे गंभीर स्थिति है।
अन्य श्रेणियां –
- उच्च मांगलिक दोष – मंगल लग्न और चंद्र कुंडली दोनों में अशुभ स्थान पर हो।
- निम्न मांगलिक दोष – मंगल केवल एक ही कुंडली (लग्न या चंद्र) में दोषपूर्ण स्थिति में हो।
मांगलिक दोष क्या है और कब बनता है?
जब मंगल ग्रह कुंडली के 1, 4, 7, 8 या 12वें भाव में स्थित होता है, तब इसे मांगलिक दोष कहते हैं। इन भावों का सीधा संबंध विवाह और पारिवारिक जीवन से होता है।
खासकर 8वां और 12वां भाव वैवाहिक सुख के लिए संवेदनशील माने जाते हैं। अगर मंगल इन स्थानों पर पाप प्रभाव में हो, तो दांपत्य जीवन में बाधाएं आ सकती हैं।
उदाहरण के लिए, सप्तम भाव विवाह का भाव है। इस स्थान पर मंगल होने से पति-पत्नी के बीच मतभेद बढ़ सकते हैं।
क्यों महत्वपूर्ण है?
हिंदू विवाह परंपरा में कुंडली मिलान के समय मंगल की स्थिति देखी जाती है। अगर लड़का और लड़की दोनों मांगलिक हों तो दोष का असर काफी हद तक कम हो जाता है।
लेकिन यदि केवल एक ही व्यक्ति मांगलिक है, तो रिश्ते में तनाव या अलगाव की संभावना बढ़ सकती है।
मांगलिक होने का मतलब
कुंडली में मंगल ग्रह अगर विवाह से जुड़े भावों में प्रभाव डालता है तो व्यक्ति को मांगलिक माना जाता है। इसका असर भाव के अनुसार बदलता है –
- लग्न (पहला भाव) – व्यक्तित्व में आक्रामकता और जल्दबाजी।
- चौथा भाव – पारिवारिक जीवन में अस्थिरता।
- सप्तम भाव – पति-पत्नी में बार-बार विवाद।
- आठवां और बारहवां भाव – स्वास्थ्य और वैवाहिक सुख पर नकारात्मक असर।
मांगलिक व्यक्ति का स्वभाव
मांगलिक जातक मेहनती और दृढ़ निश्चयी होते हैं। वे निर्णय लेने में सक्षम होते हैं लेकिन स्वभाव में कठोरता और अनुशासन झलकता है।
रोमांस के मामले में ये लोग व्यावहारिक सोच रखते हैं। उदाहरण के लिए, ऐसा व्यक्ति करियर और जिम्मेदारियों को प्राथमिकता देता है, जिससे रिश्तों में लचीलापन कम हो सकता है।
मांगलिक दोष से जुड़े आम मिथक
- मांगलिक और गैर-मांगलिक की शादी हमेशा असफल होती है – यह गलत है। शादी की सफलता आपसी समझ पर निर्भर करती है।
- सभी मांगलिक व्यक्तियों को पहले पेड़ या मूर्ति से शादी करनी होती है – यह हर स्थिति में जरूरी नहीं। उपाय कुंडली देखकर तय होते हैं।
- मंगलवार को जन्म लेने वाला हमेशा मांगलिक होता है – यह भी मिथक है। मंगल दोष जन्मकुंडली के ग्रहों की स्थिति से तय होता है।
मांगलिक दोष के अशुभ प्रभाव

- विवाह में लगातार रुकावट
- पति-पत्नी के बीच विवाद और तनाव
- आर्थिक परेशानियां
- स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं
- गंभीर मामलों में अलगाव या तलाक
मांगलिक दोष के प्रभावी उपाय

यदि मांगलिक दोष है, तो घबराने की जरूरत नहीं। ज्योतिष में इसके कई उपाय बताए गए हैं।
1. व्रत और पूजा – मंगलवार को व्रत रखें और हनुमान जी की पूजा करें। भगवान कार्तिकेय का अभिषेक भी लाभकारी है।
2. मंगला गौरी व्रत – विशेषकर कन्याओं के लिए लाभदायक माना जाता है।
3. पीपल या वट वृक्ष विवाह – यह उपाय केवल विशेष परिस्थितियों में किया जाता है और गुप्त रखना जरूरी है।
4. रत्न धारण – मूंगा रत्न मंगल ग्रह को शांत करने में मदद करता है। इसे पहनने से पहले अनुभवी ज्योतिषी से सलाह लें।
5. दान-पुण्य – लाल वस्त्र, गेहूं, मसूर दाल, सोना और तांबा दान करना शुभ माना जाता है।
6. मंत्र और स्तोत्र – हनुमान चालीसा और महामृत्युंजय मंत्र का नियमित जाप करें।
7.विशेष पूजा – उज्जैन के अंगारेश्वर महादेव मंदिर में मंगल दोष शांति के लिए पूजा विशेष रूप से प्रभावी मानी जाती है।
8.अन्य उपाय – पानी में लाल चंदन डालकर स्नान करें और मंगलवार को मसूर दाल और लाल फूल शिवलिंग पर चढ़ाएं।
क्या मांगलिक दोष हमेशा रहता है?
कई ज्योतिषियों के अनुसार 28 साल की आयु के बाद इसका असर कम हो जाता है। लेकिन जल्दी शादी करनी हो, तो उपाय करना आवश्यक है।
व्यावहारिक सुझाव
हमेशा अनुभवी ज्योतिषी से सलाह लें।
बिना जानकारी के महंगे और जटिल उपायों में पैसा बर्बाद न करें।
वैवाहिक जीवन की सफलता केवल ज्योतिष पर नहीं, बल्कि आपसी समझ और धैर्य पर भी निर्भर करती है।
निष्कर्ष
मांगलिक दोष एक महत्वपूर्ण ज्योतिषीय स्थिति है, जो विवाह और पारिवारिक जीवन को प्रभावित कर सकती है। लेकिन यह जीवनभर का संकट नहीं है। सही ज्योतिषीय सलाह, उपाय, और मानसिक संतुलन से इसके दुष्प्रभाव को कम किया जा सकता है।
कुंडली मिलान में मंगल की स्थिति अवश्य जांचें, ताकि समय रहते उचित कदम उठाए जा सकें। मांगलिक दोष का समाधान सरल उपायों और समझदारी से किया जा सकता है।
FAQs
कौन सा मंगल दोष हानिकारक है?
सबसे हानिकारक मंगल दोष वह होता है जब मंगल 1, 4, 7, 8 या 12वें भाव में अशुभ स्थिति में हो और इसके साथ अन्य पाप ग्रह जैसे राहु, केतु या शनि भी मौजूद हों। इसे त्रिबल मांगलिक दोष या घोर मांगलिक दोष कहा जाता है। इस स्थिति में वैवाहिक जीवन में गंभीर तनाव, अलगाव, आर्थिक समस्याएं और स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियां आने की संभावना रहती है। खासकर 7वां, 8वां और 12वां भाव सबसे ज्यादा प्रभाव डालते हैं।
मांगलिक और आंशिक मांगलिक में क्या अंतर है?
मांगलिक दोष तब बनता है जब मंगल ग्रह जन्मकुंडली के 1, 4, 7, 8 या 12वें भाव में हो। यह पूर्ण रूप से मांगलिक स्थिति है और विवाह में बड़ी रुकावट मानी जाती है।
आंशिक मांगलिक दोष तब होता है जब मंगल केवल एक कुंडली (लग्न या चंद्र) में इन भावों में स्थित हो, न कि दोनों में। आंशिक मांगलिक का असर सामान्य मांगलिक दोष से कम होता है और कई बार यह उपायों से पूरी तरह शांत हो जाता है।
घोर मांगलिक क्या होता है?
घोर मांगलिक या त्रिबल मांगलिक दोष वह स्थिति है जब मंगल 1, 4, 7, 8 या 12वें भाव में हो और उसके साथ शनि, राहु या केतु जैसे पाप ग्रह भी मौजूद हों। यह स्थिति विवाह के लिए सबसे अशुभ मानी जाती है। इससे दांपत्य जीवन में गंभीर मतभेद, मानसिक तनाव और कभी-कभी अलगाव तक की नौबत आ सकती है। ऐसे मामलों में विवाह से पहले ज्योतिषीय उपाय करना बेहद जरूरी है।
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विजय वर्मा वैदिक ज्योतिष (Vedic Astrology) और रत्न विज्ञान (Gemstone Science) में 20+ वर्षों का अनुभव रखते हैं। उन्होंने 10,000 से अधिक कुंडलियों (Horoscopes) का विश्लेषण किया है और व्यक्तिगत व पेशेवर उन्नति के लिए सटीक मार्गदर्शन प्रदान किया है। उनका अनुभव उन्हें एक भरोसेमंद ज्योतिष विशेषज्ञ बनाता है।