अंगारक योग कब तक रहेगा 2025 में? ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, अंगारक योग एक बेहद महत्वपूर्ण और प्रभावशाली योग है जो जीवन में बड़े बदलाव ला सकता है।
वर्ष 2025 में यह योग कब तक बना रहेगा, यह जानना आपके लिए जरूरी है क्योंकि इस दौरान गुस्सा, तनाव और अचानक होने वाली घटनाएं बढ़ सकती हैं।
क्या यह योग आपके जीवन को प्रभावित करेगा? क्या इस समय आपको सावधान रहना चाहिए या कोई खास उपाय करने चाहिए? इन सभी सवालों के जवाब आपको आगे पढ़ने पर मिलेंगे, जिससे आप इस अशुभ योग के प्रभाव को कम कर सकेंगे।
अंगारक योग कब तक रहेगा 2025 में? (Until When Is Angarak Yoga in 2025 Active?)

अंगारक योग तब बनता है जब मंगल और केतु एक ही राशि में आते हैं। वर्ष 2025 में यह योग सिंह राशि में बन रहा है।
मंगल 7 जून 2025 को सिंह राशि में प्रवेश कर चुके हैं और केतु पहले से ही वहां स्थित है। इन दोनों की युति के कारण यह अशुभ योग बना है।
ज्योतिष के अनुसार यह स्थिति 28 जुलाई 2025 तक बनी रहेगी। इस अवधि में गुस्सा, तनाव, रिश्तों में मतभेद और अचानक होने वाली घटनाओं से सावधान रहना बेहद जरूरी है।
अंगारक योग कैसे बनता है?
जब किसी जन्म कुंडली में मंगल और केतु या राहु एक ही भाव में स्थित होते हैं, तब अंगारक योग का निर्माण होता है।
वर्तमान में यह योग सिंह राशि में बना हुआ है, क्योंकि 7 जून 2025 से मंगल और केतु सिंह राशि में हैं और यह स्थिति 28 जुलाई तक रहेगी।
इस अवधि में लोगों को अपने गुस्से, जल्दबाज़ी और गलत निर्णयों से बचना होगा। खासकर करियर, रिश्तों और वित्त से जुड़े मामलों में सतर्क रहना जरूरी है।
अंगारक योग के प्रमुख दुष्प्रभाव

यह योग जातक के जीवन में कई चुनौतियां लाता है। सबसे बड़ा असर व्यक्ति के स्वभाव और रिश्तों पर पड़ता है।
- व्यक्ति गुस्सैल और हठी हो जाता है।
- जल्दबाजी में निर्णय लेने से आर्थिक नुकसान हो सकता है।
- पारिवारिक जीवन में तनाव बढ़ता है, दांपत्य जीवन प्रभावित हो सकता है।
- अपराध, हिंसा या कानूनी मामलों में फंसने की संभावना बढ़ जाती है।
- यह योग स्वास्थ्य पर भी असर डालता है, जैसे रक्त विकार, त्वचा रोग, सर्जरी या दुर्घटना।
लाल किताब में अंगारक योग को “पागल हाथी” या “बिगड़ैल सिंह” कहा गया है, क्योंकि यह योग जीवन में असंतुलन पैदा करता है।
क्यों है यह योग इतना खतरनाक?
मंगल और केतु दोनों ही पाप ग्रह माने जाते हैं। मंगल शक्ति और आक्रामकता का प्रतीक है, जबकि केतु अस्थिरता और भ्रम का। दोनों की युति वायु और अग्नि के मेल जैसी स्थिति पैदा करती है, जिससे व्यक्ति के जीवन में मानसिक तनाव, गुस्सा, दुर्घटनाएं और विवाद बढ़ जाते हैं।
अंगारक योग का असर भाव अनुसार
अंगारक योग का परिणाम कुंडली के उस भाव पर निर्भर करता है जिसमें यह बनता है। आइए जानते हैं इसके प्रभाव:
- प्रथम भाव: जातक गुस्सैल, जिद्दी और लापरवाह बनता है। चोट लगने या दुर्घटना का खतरा रहता है।
- द्वितीय भाव: वाणी में कठोरता, पारिवारिक विवाद और अवैध तरीकों से धन कमाने की प्रवृत्ति।
- तृतीय भाव: साहसी लेकिन विवादप्रिय। झगड़े और धमकी की प्रवृत्ति बढ़ सकती है।
- चतुर्थ भाव: घर में शांति की कमी, माता से मतभेद और संपत्ति विवाद।
- पंचम भाव: प्रेम संबंधों में अस्थिरता, संतान सुख में बाधा।
- षष्ठ भाव: कार्यस्थल पर संघर्ष, शत्रुओं से विवाद।
- सप्तम भाव: वैवाहिक जीवन में तनाव, अलगाव और हिंसा की संभावना।
- अष्टम भाव: अचानक दुर्घटनाएं, स्वास्थ्य समस्याएं, कानूनी परेशानियां।
- नवम भाव: पिता और गुरु से मतभेद, करियर में उतार-चढ़ाव।
- दशम भाव: कार्यक्षेत्र में चुनौतियां, सफलता में देरी।
- एकादश भाव: आर्थिक लाभ के साथ विवाद भी बढ़ सकते हैं।
- द्वादश भाव: विदेश यात्रा और खर्चों में वृद्धि, दांपत्य जीवन प्रभावित।
कौन सी परेशानियां बढ़ सकती हैं?
- रिश्तों में तनाव और झगड़े
- करियर और व्यापार में रुकावटें
- बार-बार दुर्घटनाएं और चोट
- मानसिक तनाव और अवसाद
- कानूनी विवाद और कोर्ट केस
- स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं जैसे रक्त विकार और सर्जरी
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अंगारक योग से बचाव के लिए उपाय

जब यह योग सक्रिय हो, तब ग्रहों की शांति के उपाय करना बेहद जरूरी है।
- रोज सुबह हनुमान चालीसा का पाठ करें।
- मंगल दोष कम करने के लिए मंगलवार को मसूर दाल, गुड़ और लाल वस्त्र दान करें।
- केतु की शांति के लिए काला कंबल, तिल और नारियल का दान करें।
- मंगलवार को हनुमान जी को सिंदूर और चमेली का तेल चढ़ाएं।
- क्रोध और लाल रंग का ज्यादा प्रयोग न करें।
- शराब और मांसाहार से दूरी बनाए रखें।
कुंडली में अंगारक योग होने पर विशेष उपाय
यदि आपकी जन्म कुंडली में यह योग स्थायी रूप से है, तो निम्न उपाय करें:
महामृत्युंजय मंत्र का रोज जाप करें—
“ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।
उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥”
ग्रह शांति के लिए योग्य ज्योतिषाचार्य से परामर्श लें और उचित यंत्र या रत्न धारण करें।
निष्कर्ष
अंगारक योग एक महत्वपूर्ण ज्योतिषीय स्थिति है जो व्यक्ति के जीवन में चुनौतियां ला सकती है। लेकिन सही उपाय, संयम और सावधानी से इसके दुष्प्रभाव कम किए जा सकते हैं।
वर्तमान में जब 28 जुलाई तक यह योग बना हुआ है, तब अपनी भावनाओं पर नियंत्रण रखना, विवादों से बचना और धार्मिक उपाय अपनाना बेहद जरूरी है।
अंगारक योग के बारे में सही जानकारी और उचित कदम आपको मानसिक शांति और जीवन में संतुलन बनाए रखने में मदद कर सकते हैं।
FAQs
क्या अंगारक योग हमेशा अशुभ होता है?
नहीं, यह जरूरी नहीं कि यह योग हर स्थिति में नकारात्मक परिणाम ही दे। अगर मंगल या केतु शुभ भाव में हों, तो यह योग साहस, अनुसंधान क्षमता और अप्रत्याशित सफलता भी दे सकता है। कई पुलिस अधिकारी, वैज्ञानिक और रक्षा क्षेत्र में सफल लोग इसी योग से प्रभावित होते हैं।
अंगारक दोष को दूर करने के लिए क्या पूजा करनी चाहिए?
अंगारक दोष को शांत करने के लिए हनुमान जी की पूजा सबसे प्रभावी मानी जाती है।
मंगलवार और शनिवार को हनुमान चालीसा का पाठ करें।
केतु की शांति के लिए काला कंबल, तिल और नारियल दान करें।
हनुमान मंदिर में सिंदूर और चमेली का तेल चढ़ाएं।
संभव हो तो महामृत्युंजय मंत्र का जाप करें और योग्य ज्योतिषाचार्य से परामर्श लें।
अंगारक दोष से क्या होता है?
अंगारक दोष तब बनता है जब कुंडली में मंगल और राहु या केतु का मेल होता है। इसके दुष्प्रभाव इस प्रकार हो सकते हैं:
व्यक्ति के स्वभाव में गुस्सा और चिड़चिड़ापन बढ़ जाता है।
पारिवारिक और दांपत्य जीवन में तनाव।
करियर और बिजनेस में रुकावटें।
बार-बार दुर्घटनाएं और स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं जैसे रक्त विकार, त्वचा रोग, सर्जरी की संभावना।

विजय वर्मा वैदिक ज्योतिष (Vedic Astrology) और रत्न विज्ञान (Gemstone Science) में 20+ वर्षों का अनुभव रखते हैं। उन्होंने 10,000 से अधिक कुंडलियों (Horoscopes) का विश्लेषण किया है और व्यक्तिगत व पेशेवर उन्नति के लिए सटीक मार्गदर्शन प्रदान किया है। उनका अनुभव उन्हें एक भरोसेमंद ज्योतिष विशेषज्ञ बनाता है।